चीन का एक रॉकेट अंतरिक्ष में अपनी कक्षा से निकलकर धरती पर आ गिरा है। इस रॉकेट का मलबा प्रशांत महासागर में गिरा है। यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस कमांड ने इस घटना की पुष्टि की है। यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस कमांड के एक ट्वीट के अनुसार, एक चीनी रॉकेट से 23 टन का मलबा वापस प्रशांत महासागर में पृथ्वी पर गिर गया है।
उसने ट्वीट किया कि यूएस स्पेस कमांड पुष्टि कर सकता है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना लॉन्ग मार्च 5बी Cजेड5बी रॉकेट दक्षिण-मध्य प्रशांत महासागर के ऊपर वायुमंडल में सुबह 4:01 बजे एमडीटी/10:01 यूटीसी 11/4 पर फिर से प्रवेश कर गया है। धरती के वातावरण में हुए इस अनियंत्रित पुनः प्रवेश के और अधिक विवरण और प्रभाव स्थल की जानकारी के लिए हम एक बार फिर आपको पीआरसी के लिए संदर्भित करते हैं।
इस पुष्टि के तुरंत बाद अमेरिका के रक्षा विभाग में 11वीं लड़ाकू कमान ने एक और ट्वीट पोस्ट किया। इस ट्वीट में उसने पुष्टि की कि चीनी लॉन्ग मार्च 5 बी रॉकेट के साथ दूसरा हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश कर गया। यह पहली घटना से ही जुड़ा हुआ था, परंतु यूएस स्पेस कमांड के क्षेत्र से बाहर था। यह भी पूर्वोत्तर प्रशांत महासागर क्षेत्र में 4 नवंबर को सुबह 4:06 बजे एमडीटी/10:06 यूटीसी पर गिरा है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यह चीन का अंतरिक्षीय घटनाक्रमों का नवीनतम दौर है, जिसमें जानबूझकर अनियंत्रित ढंग से वायुमंडल में पुन: प्रवेश जैसी घटनाएं शामिल हैं। रॉकेट निर्माण के दौरान इसे लोगों से दूर धरती पर एक विशिष्ट स्थान पर गिरने के लिए निर्देशित करने वाली प्रणाली से लैस नहीं किया गया था। यह चौथी बार है जब चीन का कोई रॉकेट पृथ्वी पर वापस गिरा है। इससे पहले 2020, 2021 और 2022 में तीन बार चीन का रॉकेट वापस धरती आकर गिरा है।
चीन ने सोमवार को अपने तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के तीसरे और अंतिम मॉड्यूल को ले जाने के लिए लॉन्ग मार्च 5 बी रॉकेट लॉन्च किया था। यह रॉकेट आज के दौर के ऑपरेशनों में सबसे शक्तिशाली रॉकेटों में से एक है, जो एक अंतरिक्ष कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह नासा के बाद दूसरे नंबर है जो कि तकनीकी रूप से काफी परिष्कृत है।
चीन ने हर बार यह जुआ खेला है कि रॉकेट के पुर्जे जमीन पर बैठे लोगों को चोट नहीं पहुंचाएंगे। हालांकि क्षति की कोई तत्कालिक रिपोर्ट भी नहीं मिली थीं। शुक्रवार को घटी ने स्पेन के हवाई क्षेत्र में बाधा जरूर डाली और हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा। इस वजह से सुबह के समय सैकड़ों उड़ानों में देरी हुई। साल 2023 में उसी डिजाइन के एक रॉकेट को कम से कम एक बार फिर से इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है।