China: चीन अपने सैन्य बलों को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है, ताकि वह अमेरिका से अपनी सैन्य ताकत के अंतर को कम कर सके और तेजी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल में अपनी रक्षा क्षमताओं को बेहतर बना सके।
चीनी सेना ने अपने सैनिकों को आधुनिक युद्ध की स्थितियों से परिचित कराने के लिए सीमा पर एक नया प्रशिक्षण मॉडल शुरू किया है। इस मॉडल के तहत सेना की विभिन्न इकाइयों मिलकर काम करती हैं और एकजुट होकर युद्ध में खास रणनीतियों का इस्तेमाल करती हैं। यह कदम चीनी सेना की तत्परता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) डेली ने यह जानकारी दी।
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चीन अपनी सेना के प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने में तेजी से काम कर रहा है, ताकि वह आधुनिक युद्ध की स्थितियों का सामना कर सके। इस नए मॉडल के तहत प्रशिक्षण को और अधिक वास्तविक और युद्ध जैसी स्थितियों के करीब लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सेना की तैयारियों और क्षमताओं में सुधार हो सके।
बीजिंग अपने सैन्य बलों को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है, ताकि वह अमेरिका से अपनी सैन्य ताकत के अंतर को कम कर सके और तेजी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल में अपनी रक्षा क्षमताओं को बेहतर बना सके। पीएलए डेली ने कहा, यूक्रेन युद्ध में उन्नत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल ने इस प्रशिक्षण को और अधिक जरूरी बना दिया है। इस कारण चीन अब अपनी सेना की अलग-अलग शाखाओं के बीच मिलकर काम करने पर जोर दे रहा है।
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यह प्रशिक्षण सीमा पर लागू करना खासतौर पर भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के मामले में महत्वपूर्ण है। हाल ही में लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच जो तनाव था, उसे हल किया गया था। इस तनाव के कारण दोनों देशों के संबंध चार वर्षों तक बिगड़े रहे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जबसे सत्ता में ए हैं, उन्होंने चीन की तीनों प्रमुख सेनाओं के एकीकरण के लिए बड़े सुधार किए हैं। जिनपिंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) और सैन्य मामलों के आयोग के प्रमुख भी हैं। उन्होंने वास्तविक समय (रियल टाइम) में युद्ध प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया है, ताकि उनकी सेना क्षेत्रीय युद्धों में कामयाबी हासिल कर सके।
पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में पीएलए डेली ने अलग-अलग सैन्य शाखाओं के बीच तालमेल के लिए एक प्रणाली बनाने की मांग की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था, कोई भी संघर्ष बिना साझा अभियानों के शुरू नहीं किया जा सकता और कोई भी जीत बिना तालमेल के हासिल नहीं की जा सकती। कोई भी सैन्य शाखा अकेले युद्ध नहीं जीत सकती।