उन्होंने कहा कि 1970 के दशक से भारतीय सेना ने बड़े पैमाने पर पर्वतीय सेना के आकार को बढ़ाया है और वहां सैनिकों व अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाई है। भारत 50 हजार सैनिकों वाला एक माउंटेन स्ट्राइक फोर्स भी बनाने की योजना तैयार कर रहा है। सियाचिन ग्लेशियर का उदाहरण देते हुए हुआंग ने लिखा, भारतीय सेना ने सियाचिन क्षेत्र में पांच हजार मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर सैकड़ों आउटपोस्ट स्थापित किए हैं। यहां छह से सात हजार सैनिक तैनात हैं।
हालांकि, हुआंग ने अपनी जानकारी का स्रोत साझा नहीं किया लेकिन हथियारों की एक सूची साझा कि जिसे लेकर उन्होंने दावा किया कि इन हथियारों को भारतीय सेना ने उंची लड़ाइयों में इस्तेमाल करने के लिए पहाड़ों में तैनात किया है। उन्होंने लिखा, 'उपकरणों को लेकर भारतीय सेना ने विदेशों और घरेलू अनुसंधान और खरीद से पठार और पहाड़ों में लड़ाई के लिए उपयुक्त हथियार बड़ी संख्या में सुसज्जित किए हैं।'
हुआंग ने लिखा, भारतीय सेना ने अमेरिका से आधुनिक भारी हथियारों की खरीद पर भी खूब खर्च किया है। इसमें दुनिया का सबसे हल्का 155 एमएम होवाइत्जर एम777 और चिनूक जैसे हेलिकॉप्टर शामिल हैं जो हथियार ले जा सकते हैं और हमले की व सुरक्षा की क्षमताओं को बढ़ाते हैं। हुआंग ने हाई कैलिबर स्नाइपर रायफलों का भी जिक्र किया जो ऊंचे स्थानों पर तैनात भारतीय सैनिकों को दी गई हैं।