चीन की दिग्गज टेक कंपनी फॉक्सकॉन पर स्कूली छात्रों पर आरोप लगा है। फॉक्सकॉन को एप्पल और अमेजन के लिए टेक उत्पाद बनाने के लिए जाना जाता है। चाइना लेबर वॉच की एक रिपोर्ट ने कंपनी पर अमेजन के स्मार्ट असिस्टेंट डिवाइस 'इको' के उत्पादन के लिए अपने प्लांट में 16-18 साल के छात्रों से हफ्ते में 60 घंटे तक काम लेने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों को नाइट शिफ्ट में काम करने को लेकर भी दबाव बनाया जाता है। इसके मुताबिक फॉक्सकॉन की एक फैक्टरी में 1,500 से ज्यादा इंटर्न से काम लिया जा रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि फॉक्सकॉन ऑर्डर पूरे करने के लिए स्थानीय वोकेशनल स्कूलों के छात्रों को इंटर्न के तौर पर काम पर रखती है। हर इंटर्न को काम के बदले में प्रति घंटे 100 रुपए या प्रतिमाह 17,600 रुपए दिए जाते हैं। इन छात्रों से श्रम नियमों का उल्लंघन कर निर्धारित समय से अधिक घंटे काम लिया जाता है।
छात्रों को 10 घंटे की शिफ्ट में काम करवाया जाता है। काम के दबाव में छात्रों को डोरमेटरी में सोना पड़ता है। साथ ही शिक्षकों की तरफ से भी छात्रों पर दबाव दिया जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रों ने शिक्षकों को बताया कि वे ओवर टाइम नहीं करना चाहते हैं लेकिन शिक्षकों ने उन्हें कहा कि यदि वे ओवर टाइम नहीं करते तो फॉक्सकॉन में इंटर्नशिप नहीं कर पाएंगे। इससे उनका ग्रेजुएशन और स्कॉलरशिप के आवेदन आदि प्रभावित होंगे।
हालांकि फॉक्सकॉन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्थानीय मैनेजरों को दोषी ठहराया है। साथ ही स्टाफ की निगरानी बढ़ाने का वादा किया है।
वहीं इस घटना की जानकारी मिलते ही ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के सीईओ जैफ बेजोस ने कहा है कि उनकी कंपनी सप्लायर आचार संहिता के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगी। वह आरोपों की जांच कराएगी। यदि फॉक्सकॉन दोषी पाई जाती है तो उसके खिलाफ कंपनी कार्रवाई करेगी।