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नेपाल की राजनीति में चीनी राजदूत की दखल से गरमाई सियासत, राष्ट्रपति से की थी मुलाकात

Tue, 07 Jul 2020 08:01 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

  • चीनी राजदूत ने गुपचुप की राष्ट्रपति भंडारी से मुलाकात, विदेश मंत्रालय ने उठाए सवाल
  • नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं से मिल रहे हैं चीनी राजदूत
  • ओली विरोधी मुहिम को रोकने और प्रचंड गुट को मनाने में भी जुटा है चीन  
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Nepali PM KP Sharma Oli with Chinese Ambassador to Nepal Hou Yanqi - फोटो : File Photo
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विस्तार
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क्या चीन अब नेपाल की अंदरूनी राजनीति में भी दखल देने लगा है? क्या ओली और प्रचंड गुटों के बीच चल रही तनातनी और सत्ता संघर्ष पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी नजर बनाकर अपने तरीके से मामले को सुलझाने में लगी है?

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दरअसल चीन का यह हस्तक्षेप नेपाल के विदेश मंत्रालय को हजम नहीं हो पा रहा है। दरअसल पिछले दिनों नेपाल में चीन की राजदूत हू यांगकी ने अचानक राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से मुलाकात की।

यही नहीं चीनी राजदूत ओली, प्रचंड और माधव नेपाल जैसे नेताओं से भी मिल चुकी हैं। इसे लेकर नेपाल में सियासी सरगर्मियां तेज हैं और आशंका जताई जा रही है कि चीन अब नेपाल की अंदरूनी राजनीति में भी अपनी दखल देने लगा है।
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तीन जुलाई को अचानक चीनी राजदूत की राष्ट्रपति से हुई मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय के कुछ अफसरों ने सवाल उठाए थे और कहा था कि जब भी कोई विदेशी मेहमान राष्ट्रपति से मिलता है तो विदेश मंत्रालय को इसकी जानकारी जरूर दी जाती है, लेकिन चीनी राजदूत की मुलाकात के बारे में उसे कुछ भी नहीं बताया गया।

उधर राष्ट्रपति के शीतल निवास से जुड़े अफसरों का इस बारे में कहना है कि हम किसी विदेशी मेहमान को मिलने से मना तो नहीं कर सकते। उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि आखिर राष्ट्रपति की नेताओं और राजनयिकों से मुलाकात को विवादों में क्यों घसीटा जा रहा है, जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है।

दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि मंत्रालय के उपसचिव स्तर का एक अधिकारी बाकायदा इसी काम के लिए नियुक्त है कि जब भी कोई राजनयिक या विदेशी मेहमान राष्ट्रपति से मिलने आएगा तो उसे इसकी खबर होगी और वह इस दौरान मौजूद रहेगा, लेकिन इस बार उसे बताया तक नहीं गया और चीनी राजदूत राष्ट्रपति भंडारी से सद्भावना मुलाकात के नाम पर मिलकर चले गए।

इसलिए विदेश मंत्रालय के पास इस बात का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है कि दोनों के बीच किन मुद्दों पर बात हुई।

उधर कहा जा रहा है कि चीन के प्रोटोकॉल के मुताबिक भंडारी से मिलने से पहले चीनी राजदूत ने ओली समेत पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात की। यहां तक कि माधव नेपाल और झालानाथ खनाल से भी उन्होंने घर जाकर मुलाकात की।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी, ओली विरोधी मुहिम और प्रचंड गुट की कोशिशों को लेकर चीन खासी दिलचस्पी दिखा रहा है। माना जा रहा है कि चीन अपने तरीके से नेपाल की सत्ता को संचालित करना चाहता है ताकि वहां हर क्षेत्र में वह घुसपैठ कर सके।

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