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कोरोना पर शी जिनपिंग से मिलीभगत के आरोपों को डब्ल्यूएचओ ने नकारा, कहा- यह बिल्कुल असत्य और निराधार

Sun, 10 May 2020 07:14 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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कोरोना वायरस को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विश्व स्वास्थ्य संगठन की मिलीभगत को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जनवरी में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस को निजी रूप से कोरोना वायरस को लेकर वैश्विक चेतावनी देर से देने के लिए कहा था। 

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जर्मनी के डेर स्पाइजेल में इस रिपोर्ट को छापा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के इंटेलीजेंस सेवाओं से यह सूचना मिली है। इंटेलीजेंस के मुताबिक 21 जनवरी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डब्ल्यूएचओ से प्रमुख से बात कर कहा कि इस महामारी के बारे में दुनिया को देरी से बताएं।

इस रिपोर्ट के छपने के बाद ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बयान जारी किया और कहा कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से भ्रामक और निराधार है। इसमें लिखा है कि 21 जनवरी को डॉ टेड्रोस और शी जिनपिंग नहीं मिले थे और ना ही फोन पर कोई बात हुई थी।
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बयान में यह भी लिखा था कि इस तरह की भ्रामक खबरों से संगठन का मनोबल कम होता है, जो कि कोरोना जैसी महामारी को लड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। बयान में कहा गया है कि चीन ने 20 जनवरी को ही कोरोना वायरस के इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की खबर दे दी थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी 22 जनवरी को इस बात की पुष्टि कर दी थी कि वुहान में इंसान से इंसान में संक्रमण फैल रहा है। अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर आरोप लगाया था कि संगठन चीनी प्रोपोगेंडा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके बाद अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को देने वाली फंडिंग रोक दी थी।

अभी पिछले हफ्ते ही राष्ट्रपति ट्रंप ने डब्ल्यूएचओ पर एक और आरोप लगाया था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन एक आपदा है, जो भी यह संगठन कह रहा है सब गलत बताया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह संगठन चीन को केंद्र में रखकर काम करता है।

ट्रंप ने कहा कि चीन जो कहता है डब्ल्यूएचओ वही करता है। हमारा देश संगठन को सालाना 450 मिलियन डॉलर का अनुदान करता है और वहीं चीन केवल 38 मिलियन डॉलर की राशि ही योगदान में देती है।

इस हफ्ते की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर आरोप लगाते हुए कहा था कि अमेरिका के पास पुख्ता सबूत हैं कि चीन ने किस तरह दुनिया को कोरोना वायरस को लेकर गलत सूचनाएं दी हैं और बहकाया है।

रविवार यानि नौ मई को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम तहकीकात करना चाहते हैं लेकिन चीन करने नहीं देता है। ट्रंप ने कहा कि निजी तौर पर उन्हें लगता है कि चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन से बहुत बड़ी गलती हुई है और ये दोनों इस गलती को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

ट्रंप का बयान तब आया जब होमलैंड सिक्योरिटी के डिपार्टमेंट ने एक रिपोर्ट साझा की जिसमें कहा गया कि अमेरिका के मुताबिक चीन ने जानबूझकर महामारी के परिणामों को स्पष्ट तौर पर नहीं बताया और चुपके से मेडिकल दवाइयों का कोष तैयार कर लिया।

एक पांच देशों के इंटेलीजेंस समूह ने जानकारी दी कि किस तरह चीन ने कोरोना वायरस पर अपने मुखबिर को गायब कर दिया था। वायरस के पहले के सैंपलों को नष्ट कर दिया और इंटरनेट से वायरस से जुड़ी सारी जानकारियों को खत्म कर दिया था।

इस पांच देशों के इंटेलीजेंस समूह में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड शामिल है। कोरोना वायरस से अब तक दुनियाभर में करीब 40 लाख लोग संक्रमित हैं और 2 लाख 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

अकेले अमेरिका में 13 लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित है और करीब 80 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले महीने ब्रिटेन के एक सांसद ने चीन को चेतावनी दी थी कि चीन को कोरोना की वजह से होने वाली मौतों की कीमत चुकानी होगी।

इस समूह की रिपोर्ट में मुख्य तौर पर यह आरोप लगाया गया है कि चीन के डॉक्टर ली वेनलियांग जिन्होंने सबसे पहले कोरोना वायरस को लेकर अलर्ट किया था, उनसे फरवरी में यह कहलवाया गया कि उन्होंने गलत जानकारी साझा की है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना को लेकर गलत जानकारी देने से कम लोगों की जान जा चुकी है। ये जरूरी है कि सरकार साफ और पारदर्शी संदेश दें ताकि आगे उचित कदम उठाकर लोगों की जानें बचाई जा सकें।

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