दक्षिण चीन सागर के कारण उत्पन्न हुए चीन-अमेरिका के बीच तनाव को कम करने के लिहाज से चीन के शीर्ष राजनायिक अपनी दो दिवसीय यात्रा पर अमेरिका जाएंगे। डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद चीन के शीर्ष डिप्लोमैट की यह पहली यात्रा है।
सोमवार से शुरू हो रही इस यात्रा का मकसद पूर्व एशिया में बढ़ रहे तनाव को कम करना व व्यापार संबंधों को सुधारना है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने बताया कि, स्टेट 'काउंसलर यांग जिएची आज से दो दिन के लिए वाशिंगटन में रहेंगे। जिएची वहां ट्रंप प्रशासन से वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चीन-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे।'
आपको बता दें कि यांग जिएची चीन के वरिष्ठ राजनायिकों में से एक हैं। यांग जिएची वाशिंगटन में अमेरिका के राजदूत भी रह चुके हैं। दरअसल चीनी राजनायिक की यात्रा इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि पहले विरोध करने के बाद अब अमेरिका चीन की 'वन चाइना' अर्थात एक चीन नीति का समर्थन कर रहा है।
चीन की इस नीति के तहत चीन, ताइवान को खुद का हिस्सा बताता है। गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ 10 फरवरी को टेलीफोन पर बातचीत के बाद ट्रंप ने चीन की वन चाइना नीति का समर्थन किया था। हालांकि भविष्य में चीन-अमेरिका के रिश्ते कैसे रहते हैं इस बात पर अभी भी संदेह बना हुआ है।
ज्ञात हो कि ट्रंप ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन पर चीटिंग करने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने चीन को दक्षिण चीन सागर में उत्पन्न विवाद के लिए भी जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि अब देखना है कि क्या चीनी राजनायिक की अमेरिका यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में जम चुकी बर्फ पिघलेगी।