पोम्पियो और वांग यी की यह मुलाकात अमेरिका द्वारा एशियाई शक्ति चीन की वैश्विक और घरेलू नीतियों पर निंदा के कुछ दिन बाद ही हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री अपने चार देशों के एशियाई दौरे के तहत सोमवार को चीन पहुंचे थे। लेकिन संयुक्त प्रेसवार्ता में दोनों नेताओं के बीच तनाव और विवाद की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
वांग यी ने कहा कि अमेरिका ने न सिर्फ व्यापार तनाव पर उथल-पुथल बढ़ाई है बल्कि ताइवान के साथ रिश्ते बढ़ाने के लिए एक के बाद एक कई कदम उठाए। जबकि चीन इस द्वीपीय क्षेत्र ताइवान को बीजिंग का एक विद्रोही प्रांत मानता है जो चीनी संप्रभुता को नुकसान पहुंचाता है।
वांग ने कहा कि इन कार्रवाईयों ने दोनों पक्षों का भरोसा प्रभावित किया है और चीन-अमेरिका रिश्तों की संभावनाओं पर गलत छाप डाली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका अब इस तरह के गुमराह करने वाले कार्यों को रोक देगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को सहयोग करना चाहिए न कि संघर्ष और टकराव में उतरना चाहिए।
वांग की टिप्पणियों का जवाब देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि जिन मुद्दों का जिक्र किया गया है उनके प्रति मेरे पास मौलिक असहमतियां हैं। उन्होंने कहा कि चीन ने जो कदम उठाए हैं उनके बारे में हमें चिंता है और मैं उन लोगों को प्रत्येक पर चर्चा का मौका देने की उम्मीद कर रहा हूं।
पिछले एक साल में अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर टकराव होता रहा है। अमेरिका ने सबसे पहले उत्तर कोरिया के साथ वार्ता में चीन के सहयोग नहीं करने पर असहमति जताई और उसके बाद अमेरिका ने चीन के अरबों डॉलर के उत्पादों पर आयात शुल्क लगा दिया।
इस कार्रवाई के साथ-साथ दक्षिण चीन सागर में भी अमेरिका ने चीन को भड़काने की कार्रवाई की और ताईवान को हथियार देने के मामले में भी अमेरिका बयान देता रहा है। चीन इन सभी मुद्दों पर अमेरिका को रिश्ते खराब करने का जिम्मेदार बताता है।