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ट्रेड वॉर: अमेरिका से नजदीकी पर चीन की भारत को खुली धमकी

Sat, 21 Jul 2018 05:33 PM IST
एजेंसी, बीजिंग
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चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर के बीच ड्रैगन ने भारत को लेकर अपना रुख कड़ा किया है। चीन ने अमेरिका से नजदीकी बढ़ाने पर भारत को चेताया है।

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चीन का कहना है कि भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए उनके खिलाफ अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों का पक्ष ले रहा है। चीनी विशेषज्ञों का कहना कि ऐसा करके भारत एक जोखिम भरे खेल को खेल रहा है। 

भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में कोई फायदा होने की संभावना नहीं है लेकिन चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के प्रयासों को कम करने के खतरे हैं।

सोमवार को भारत के वाणिज्य विभाग ने दो साल की अवधि के लिए चीन से आयात होने वाले सोलर सेल्स और मॉड्यूल पर 25 फीसदी का भारी शुल्क लगाया है। वहीं भारत सरकार ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर भी चिंता व्यक्त की है। 
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भारत का दावा है कि चीन ने भारतीय पेशेवरों को वीजा दिए जाने और भारतीय आईटी सेवाओं, मीट, चावल और दवाओं के निर्यात पर रोक लगा दी है।

चाइना सेंटर फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स रिसर्च के निदेशक लिन बोकियांग ने मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स से कहा, ‘यह स्पष्ट है कि भारत चीन के खिलाफ ट्रंप के संरक्षणवादी उपायों की नकल करने का प्रयास कर रहा है।’ लिन ने कहा कि भारत ने अपने घरेलू उद्योगों के संरक्षण के लिए ही सोलर पैनल पर शुल्क लगाया है। 

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अपने उद्योगों को प्रतियोगी बनाए भारत  

चीन के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्ट्रैटेजी के एसोसिएट फेलो लिऊ जियाउ ने कहा ग्लोबल टाइम्स से कहा, ‘भारत अपने व्यापार घाटे को लेकर काफी संवेदनशील है... इसलिए उसने चीन से बड़े बाजार तक पहुंच बनाने के लिए अमेरिका से हाथ मिलाया है।’ लिऊ ने कहा कि यदि भारत चीन के साथ अपना व्यापार घाटा कम करना चाहता है तो उसे शुल्क लगाने की बजाय अपने उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना होगा। 

अमेरिका के खिलाफ शीत युद्ध जैसे हालात बना रहा चीन

सीआईए के एशिया मामलों के एक शीर्ष विशेषज्ञ ने यह दावा किया है कि विश्व शक्ति के रूप में अमेरिका का स्थान लेने के लिए चीन सभी हथकंडे अपना रहा है। 

कॉलोराडो में ‘ऐस्पन सिक्योरिटी फोरम’ के दौरान शुक्रवार को सीआईए के ईस्ट एशिया मिशन सेंटर के सहायक निदेशक माइकल कॉलिन्स ने कहा, ‘मैं कहना चाहूंगा... कि वह हमारे खिलाफ जो (जंग) कर रहे हैं वह मूल रूप से शीत युद्ध है... जो (अमेरिका और सोवियत संघ के बीच  चली) शीत युद्ध की तरह नहीं लेकिन पारिभाषिक तौर पर शीतयुद्ध है। 

उन्होंने कहा चीन युद्ध नहीं करना चाहता लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार विभिन्न मोर्चों पर अमेरिका को कमजोर करने के लिए काम कर रही है।
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