पिछले दो महीने से भूटान में डोकलाम सीमा पर भारत और चीन के बीच तनातनी जारी है। दोनों देशों की तरफ़ से कोई संकेत नहीं मिल रहा है कि यह तनाव कब ख़त्म होगा।इस पूरे परिदृश्य में चीन और भारत तो दिख रहे हैं लेकिन भूटान कहां है? क्या भूटान पूरे मामले पर खामोश है?
विदेशी मामलों के जानकार और बीजेपी नेता शेषाद्री चारी कहते हैं कि भूटान इसमें खामोश नहीं है। उन्होंने कहा कि भूटान ने चीन के सामने अपनी बातें रख दी हैं। उन्होंने कहा, "भूटान और भारत के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। हम दोनों के बीच एक समझौता भी है जिसके तहत आर्थिक और सामरिक स्तर पर दोनों देश साथ हैं। डोकलाम सीमा पर सड़क निर्माण को लेकर भूटान ने अपनी आपत्ति जता दी है।"
भूटान और नेपाल भारत के दो ख़ास पड़ोसी देश हैं। नेपाल से भारत के संबंधों में उतार-चढ़ाव कई बार देखने को मिले हैं। नेपाल और चीन के बीच संबंधों को लेकर भारतीय मीडिया में अक्सर ऐसी ख़बरें आती हैं कि वह भारत के मुक़ाबले चीन के ज़्यादा क़रीब जा रहा है।
हाल ही में नेपाल चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट वन बेल्ट वन रोड में भी शामिल हुआ। दूसरी तरफ़ भारत ने इसका बहिष्कार किया था।भूटान और चीन के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। वहीं भारत और भूटान के बीच काफ़ी गहरे संबंध हैं। दोनों देशों के बीच 1949 में फ्रेंडशिप ट्रिटी हुई थी। इसके तहत भूटान को अपने विदेशी संबंधों के मामले में भारत को भी शामिल करना होता था। 2007 में इस समझौते में संशोधन हुआ था।
भारत-भूटान में फ्रेंडशिप संधि
चीनी मीडिया में अक्सर इस तरह की रिपोर्ट छपती है कि भारत भूटान और नेपाल जैसे देशों में मननानी कर रहा है। क्या भूटान और भारत की क़रीबी चीन को खटकता है? इस पर शेषाद्री चारी कहते हैं, "चीन ने भूटान के साथ सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश की। वह चाहता था कि इसमें भारत शामिल नहीं हो। हालांकि इस मामले में भूटान ने साफ़ कहा कि जो भी बात होगी वो भारत की मौजूदगी में होगी।"
इस सवाल पर जेएनयू में दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र की प्रोफ़ेसर सबिता पांडे कहती हैं, "1949 में भारत और चीन के बीच जो फ्रेंडशिप समझौता हुआ था उसमें 2007 में संशोधन किया गया था। संशोधन से पहले इस समझौते में था कि भूटान सभी तरह के विदेशी संबंधों के मामले में भारत को सूचित करेगा। संशोधन के बाद इसमें जोड़ा गया कि जिन विदेशी मामलों में भारत सीधे तौर पर जुड़ा होगा उन्हीं में उसे सूचित किया जाएगा।"