विदेश मंत्री
सुषमा स्वराज ने सोमवार को चीन जाकर कहा कि भारतीय और चीनी लोगों को एक-दूसरे की भाषा सीखना चाहिए। इससे संचार की बाधाएं तो दूर होंगी ही साथ ही आगे चलकर दोनों पड़ोसियों के संबंध भी मजबूत होंगे। अपनी चार दिनी यात्रा के दौरान सुषमा स्वराज
भारतीय दूतावास द्वारा भारत-चीन दोस्ती में हिंदी के योगदान विषय पर भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि जब दो दोस्त बैठते हैं तो वे यही चाहते हैं कि एक-दूसरे से दिल की बात कहें, उनकी भावनाओं को साझा करें और इसके लिए भाषा सबसे जरूरी माध्यम होती है। उन्होंने कहा कि दुभाषिया शब्दों का अनुवाद तो कर सकता है लेकिन भावनाओं का नहीं। सुषमा ने कहा, भारतीय फिल्में तेजी से चीन में प्रसिद्ध हो रही हैं। मैं कल विदेश मंत्री वांग यी से बात कर रही थी, उन्होंने जिक्र किया कि दंगल, सीक्रेट सुपरस्टार और हिंदी फिल्में यहां बहुत हिट हुई हैं। सुषमा ने चीन के उन 25 छात्रों के जल्द भारत दौरे पर आने का भी आश्वासन दिया, जो हिंद सीख रहे हैं।
सुषमा ने हिंदी सीखने वाले चीनी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा भारत-चीन की दोस्ती को सबसे ज्यादा मजबूत हिंदी भाषा से प्रेम करने वाले चीनी छात्र कर सकते हैं। उन्होंने बताया, ‘एक लड़की ने कहा कि उसका सपना भारत भ्रमण का है और वह नहीं जानती कि यह सपना कब सच होगा। सुषमा ने कहा, आपका सपना जल्द ही सच होगा। मैंने भारतीय राजदूत से अभी-अभी यहां बैठे हिंदी सीखने वाले सभी छात्रों में से 25 को भारत भेजने को कहा है।’
चीनी विदेश मंत्री, उपराष्ट्रपति समेत किर्गिस्तान व उजबेक विदेश मंत्रियों से भी की मुलाकात
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के अपने समकक्षों से मुलाकात की और ट्रेड व निवेश समेत रक्षा, फार्मा, आईटी, पर्यटन व संस्कृति आदि कई मुद्दों पर बातचीत की। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने चीन पहुंची सुषमा ने चीनी समकक्ष वांग यी से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों पर वार्ता की। यी के साथ उन्होंने दोनों देशों के बीच रिश्तों को और अधिक सुधारने पर जोर दिया। द्विपक्षीय रिश्तों पर सुषमा ने चीन के उप राष्ट्रपति वांग किशेन से भी मिलीं।