वैश्विक मुद्दों पर बात करते हुए जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों की मित्रता अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थायित्व के लिए अहम है। उनका यह बयान ऐसे समय है, जब अमेरिका समेत कई देशों ने आर्थिक मामलों को लेकर सुरक्षात्मक मानक लागू कर दिए हैं। हाल में अमेरिका ने चीन के एल्युमिनियम और स्टील उत्पादों पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है।
भारत ने कहा कि इस तरह के कदमों को खारिज किया जाना चाहिए। भारत ने ज्यादा खुले, समग्र और बराबरी वाले आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत की। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच 2014 में अनौपचारिक बातचीत की शुरुआत हुई थी। तब पीएम मोदी ने गुजरात के साबरमती आश्रम में जिनपिंग का स्वागत किया था। इसके बाद दर्जनों अंतरराष्ट्रीय बैठकों के दौरान दोनों की मुलाकात हो चुकी है।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से पहले हुबेई म्यूजियम में पेश सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारत और चीन की मिलीजुली संस्कृति देखने को मिली। रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि कार्यक्रमों में बॉलीवुड, योग और हमारी संस्कृति का चीन पर प्रभाव साफ दिखाई दिया।
जिनपिंग ने मोदी को दिखाई प्रदर्शनी
एक-दूसरे के साथ समय बिताने के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने मोदी को हुबेई म्यूजियम में जेंग संस्कृति के अवशेषों और खजानों से जुड़ी मार्किस यी की प्रदर्शनी दिखाई। म्यूजियम में बड़ी संख्या में चीन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवशेषों को संजोया गया है।