एक-दूसरे के साथ समय बिताने के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने मोदी को हुबेई म्यूजियम में जेंग संस्कृति के अवशेषों और खजानों से जुड़ी मार्किस यी की प्रदर्शनी दिखाई। म्यूजियम में बड़ी संख्या में चीन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवशेषों को संजोया गया है।
ऐसी वार्ता बननी चाहिए परंपरा : मोदी
ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान मोदी ने सदियों पुराने भारत-चीन संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देशों के पास साथ काम करने के बहुत मौके हैं। इससे दोनों देशों के लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा, 'दोनों देशों के बीच ऐसी अनौपचारिक बातचीत की परंपरा बननी चाहिए। मुझे 2019 में भारत में ऐसी ही अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए जिनपिंग को आमंत्रित करने में खुशी होगी।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों पर दुनिया की 40 फीसदी आबादी के लिए काम करने की जिम्मेदारी है। हमारे पास अपने लोगों के साथ ही दुनिया की भलाई के लिए काम करने का मौका है। मोदी ने 2000 साल के इतिहास को याद करते हुए कहा कि भारत-चीन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति और मजबूती दी है। करीब 1600 साल दोनों देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में 50 फीसदी हिस्सेदारी रही।
उन्होंने जिनपिंग से कहा, 'शायद मैं पहला भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसके स्वागत के लिए आप दो बार बीजिंग से बाहर आए हैं। इस पर भारतीयों को गर्व होता है। इससे पहले 2015 में जिनपिंग ने अपने गृहनगर शिआन में मोदी का स्वागत किया था। पिछले पांच साल में हमने काफी कुछ हासिल किया है। हम कई मौके पर एक-दूसरे से मिले। दोनों देशों ने अपने संबंधों और सहयोग को मजबूती दी है। हमने सकारात्मक प्रगति की है।