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चीन ने नेपाल के साथ मिलकर भारत को दिया ये बड़ा झटका

Thu, 08 Dec 2016 08:43 PM IST
एजेंसी/ बीजिंग
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इंटरनेट कनेक्टिविटी को लेकर भारत पर नेपाल की निर्भरता को कम करने के इरादे से चीन की अग्रणी दूरसंचार कंपनी ने नेपाली दूरसंचार कंपनी से करार किया है। सीमा पार इंटरनेट प्रोटोकोल सर्विस उपलब्ध कराने के लिए हुए इस करार को भारत के लिए झटका माना जा रहा है। 
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इससे पहले जून में गीलोंग (कीरोंग)-रसुवागाधी सीमा के रास्ते दोनों देश ऑप्टिकल फाइबर से जुड़े थे, जिसके बाद से वैश्विक दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं से जुड़ने की नेपाल की भारत पर निर्भरता काफी कम हुई।

अब नेपाल चीन के हांगकांग डाटा सेंटर से सीधे जुड़ सकता है, जो एशिया का सबसे बड़ा डाटा सेंटर है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अब हांगकांग में नेपाल की सरकारी ‘नेपाल टेलीकॉम’ और ‘चाइना टेलीकॉम ग्लोबल’ के बीच यह करार सामने आया है। 
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फिलहाल दोनों देश जमीन के रास्ते केबल से जुड़े हैं

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने नेपाल टेलीकॉम के हवाले से बताया कि चीन के गीलोंग बंदरगाह (केरुंग) का इस्तेमाल करके इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल दोनों देश जमीन के रास्ते केबल से जुड़े हैं।

इससे नेपाल को दूसरे देशों के दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों से जुड़ने में मदद मिलेगी। भारतीय क्षेत्र से मौजूदा कनेक्टिविटी के बाद नेपाल के लिए यह अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का विकल्प है। 

इस करार के जरिए नेपाल के लिए चीन के रास्ते इंटरनेट सेवा तक पहुंच बनाना संभव हो गया है। इससे पहले तक नेपाल को सिर्फ भारत के रास्ते ही इंटरनेट सेवा मिलती रही है। फिलहाल भैरहवा, बीरगंज और विराटनगर के दक्षिणी सीमा से सटे टाउन के जरिए नेपाल टेलीकॉम कई भारतीय दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों से जुड़ी है।
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