इंटरनेट कनेक्टिविटी को लेकर भारत पर नेपाल की निर्भरता को कम करने के इरादे से चीन की अग्रणी दूरसंचार कंपनी ने नेपाली दूरसंचार कंपनी से करार किया है। सीमा पार इंटरनेट प्रोटोकोल सर्विस उपलब्ध कराने के लिए हुए इस करार को भारत के लिए झटका माना जा रहा है।
इससे पहले जून में गीलोंग (कीरोंग)-रसुवागाधी सीमा के रास्ते दोनों देश ऑप्टिकल फाइबर से जुड़े थे, जिसके बाद से वैश्विक दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं से जुड़ने की नेपाल की भारत पर निर्भरता काफी कम हुई।
अब नेपाल चीन के हांगकांग डाटा सेंटर से सीधे जुड़ सकता है, जो एशिया का सबसे बड़ा डाटा सेंटर है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अब हांगकांग में नेपाल की सरकारी ‘नेपाल टेलीकॉम’ और ‘चाइना टेलीकॉम ग्लोबल’ के बीच यह करार सामने आया है।