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मुस्लिमों को जबरन वर्जित मांस और शराब पिला रहा चीन, किया जा रहा ब्रेनवाश

Fri, 18 May 2018 04:48 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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चीन में मुस्लिमों को शिक्षित करने के नाम पर खोले गए कैंपों का सच अब दुनिया के सामने आ गया है। इस कैंप में रह चुके एक मुस्लिम कायरात समरकंद ने बताया कि वहां पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और ब्रेनवाश करने की भी कोशिशें हुईं। एक अन्य शख्स ऊमर बेकाली ने कहा कि इन कैंपों में घटिया गुणवत्ता का खाना दिया जा रहा है। कुछ अच्छा मांगने पर सजा के तौर पर जबरन वर्जित मांस और शराब पिलाई जाती है। जो इस्लाम में हराम है।

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सजा के तौर पर जबरन वर्जित मांस और शराब पिलाई जाती है

समरकंद का कहना है कि उनका अपराध सिर्फ इतना सा था कि वह मुस्लिम हैं और पड़ोसी देश कजाखस्तान चले गए थे। उनसे बेहद सख्ती से तीन दिन तक पूछताछ की गई। नवंबर में उन्हें तीन महीने के लिए दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए बनाए गए ‘रीएजुकेशनल कैंप’ भेज दिया गया। वहां पर उन्हें बेइज्जत किया जाता था, घंटों वामपंथी प्रोपेगेंडा पढ़ने को मजबूर किया जाता था। ब्रेनवाश की कोशिशों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शुक्रिया अदा करने वाले और लंबी उम्र की कामना करने वाले नारे लगवाए गए। 

हाथों-पैरों में 12 घंटे तक बेड़ियां बंधवा दी जाती हैं

वहीं इन नियमों का पालन ना करने वाले, बहस करने वाले या पढ़ाई के लिए देर से आने वालों के हाथों-पैरों में 12 घंटे तक बेड़ियां बंधवा दी जाती थीं। नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ लोगों का मुंह पानी में डाल दिया जाता था। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यूरोपियन स्कूल ऑफ कल्चर ऐंड थियॉलजी इन कोर्नटल के आद्रियान जेंज ने कहा है कि चीन के इन रीएजुकेशन कैंप में कई हजार मुस्लिमों को रखा गया है। चीन के शिनजियांग प्रांत में करीब एक करोड़ 10 लाख मुस्लिम हैं और इसकी कुल आबादी 2 करोड़ 10 लाख है। इनमें से एक बड़ी संख्या को हिरासत में ले लिया गया है, जिनमें अधिकतर युवा पुरुष हैं।
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उईगुर मुस्लिमों पर लगते रहे हैं आतंक के आरोप 

शिनजियांग में रह रहे मुस्लिम (उईगुर) समुदाय पर आतंक फैलाने का आरोप लगाते हुए चीन अक्सर कई पाबंदियां लागू करता रहता है। बीते साल सितंबर में ही शिनजियांग प्रांत के अधिकारियों ने उईगुर समुदाय को चेतावनी दी थी कि उन्हें कुरान, नमाज पढ़ने वाली चटाई सहित सभी धार्मिक चीजें सौंपनी होगी वरना वे कड़ी सजा के हकदार होंगे। समरकंद ने बताया कि करामागे गांव के एक कैंप में ही करीब 5 हजार 700 लोगों को बंदी बनाकर रखा गया है। इनमें लगभग सभी लोग कजख या उईगुर समुदाय के हैं। इतना ही नहीं करीब 200 लोग धार्मिक चरमपंथ को बढ़ावा देने के मामलों में संदिग्ध हैं। 

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