दरअसल चीन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगवाने के भारत और अन्य देशों के प्रयासों में बार-बार अड़ंगा लगाता रहा है। अब पर्यवेक्षकों की नजरें फ्रांस के उस कदम पर टिकी है, जिसमें वह संयुक्त राष्ट्र में अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी की सूची में शामिल कराने का प्रस्ताव लाएगा।
इस पर चीन के रुख से भारत के साथ उसके रिश्ते पर असर जरूर पड़ेगी। फ्रांस दरअसल सुरक्षा परिषद का एक स्थायी सदस्य है और उसने आधिकारिक रूप से मसूद अजहर को यूएन की आतंक विरोधी 1267 समिति में दर्ज कराने की घोषणा की है।