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'चीनी सरकार दर्द देने के बजाय उन्हें गोली मार दे'

Sat, 03 Feb 2018 06:04 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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चीन में वीगर समुदाय के अल्पसंख्यक मुसलमान - फोटो : BBC
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चीन में रह रहे मुसलमानों के प्रति वहां सुरक्षा बलों के बर्ताव पर ब्रिटिश सरकार ने चिंता जताई है। वहां के शिनजियांग प्रांत में कई लोगों को बिना मुकदमे के हिरासत में लेने की बात सामने आई है। अप्रैल 2017 की शुरुआत में भी शिनजियांग में सरकार ने इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ अभियान के तहत वीगर मुस्लिमों पर नए प्रतिबंध लगाए थे।
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इनमें 'असामान्य' रूप से लंबी दाढ़ी रखने, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब लगाने और सरकारी टीवी चैनल देखने से मना करने जैसी पाबंदियाँ शामिल थीं। साल 2014 के रमजान में मुसलमानों के रोजे रखने पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन इसकी वजह क्या है। क्यों डरे हुए हैं चीन में रह रहे मुसलमान।

वैसे तो दूर से देखने पर यह जगह चीन में होने पर भी इराक की राजधानी बगदाद जैसी दिखाई देती है, लेकिन यह है पश्चिमी चीन का शिनजियांग प्रांत, जहाँ रहने वालों पर सुरक्षा बलों की पैनी निगाह है।
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यहाँ वीगर समुदाय के लोग रहते हैं, जो कि मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। वो यहां डर के माहौल में रह रहे हैं। सरकारी जासूसों की निगाह हर पल उन पर पहरा डाले रखती है, उनसे सवाल पूछे जाते हैं तो वो खुलकर इनका जवाब भी नहीं दे पाते हैं।

यहां के लाखों निवासियों से जबरन डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं। उनके मोबाइल खंगाले जाते हैं और पता लगाया जाता है कि कहीं वो सांप्रदायिक या भड़काऊ संदेशों का आदान-प्रदान तो नहीं कर रहे हैं और अगर किसी पर चीन से गद्दारी करने का हल्का सा भी शक हुआ तो उन्हें खुफिया जेलों में भेज दिया जाता है। 

कौन हैं वीगर मुसलमान

चीन में वीगर समुदाय के अल्पसंख्यक मुसलमान - फोटो : BBC
जेलों में डाला 

गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार हजारों वीगर मुसलमानों को बिना मुकदमों के जेलों में डाला गया है। हम शिनजियांग में जहाँ भी गए, हमें रोका गया, तलाशी ली गई और पीछा होता रहा। 

सैकड़ों वीगर मुसलमानों की तरह अब्दुर्रहमान हसन चीन छोड़ तुर्की चले गए थे। उन्हें लगा था कि उनकी मां और पत्नी चीन में सुरक्षित होंगे, लेकिन उन्हें आखिरी बार यही पता लगा कि उनकी मां और पत्नी को जेल भेज दिया गया है।

अब्दुर्रहमान कहते हैं, "सुबह से शाम तक उन्हें बस एक कुर्सी पर बिठाया जाता है। मेरी मां को इस तरह की सजा भुगतनी पड़ रही है। मेरी पत्नी का कसूर सिर्फ इतना है कि वो वीगर है और इसकी वजह से वो एक कैंप में रहती है, जहाँ उसे जमीन पर सोना पड़ता है। मुझे यह भी नहीं पता कि वो जिंदा हैं या मर चुके हैं। मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं चाहता हूं कि चीनी सरकार उन्हें दर्द देने के बजाय मार दे। गोलियों के पैसे मैं दूंगा।"

दूसरी ओर, चीन वीगर मुसलमानों पर किसी तरह के जुल्मों से इनकार करती रही है। चीन हाल में दुनिया में हुए चरमपंथी हमलों का हवाला देकर इस्लामिक चरमपंथ को बड़ा खतरा बताता है। 

कौन हैं वीगर मुसलमान 

चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में चीनी प्रशासन और यहां के स्थानीय वीगर जनजातीय समुदाय के बीच संघर्ष का बहुत पुराना इतिहास है। वीगर असल में मुसलमान हैं। सांस्कृतिक और जनजातीय रूप से वह खुद को मध्य एशियाई देशों के नजदीकी मानते हैं। सदियों से इस इलाके की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार केंद्रित रही है। यहां के काशगर जैसे कस्बे प्रसिद्ध सिल्क रूट के बहुत सम्पन्न केंद्र रहे हैं।

बीसवीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में वीगरों ने थोड़े समय के लिए खुद को आजाद घोषित कर दिया था। इस इलाके पर कम्युनिस्ट चीन ने 1949 में पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया था। दक्षिण में तिब्बत की तरह ही शिनजियांग भी आधिकारिक रूप से स्वायत्त क्षेत्र है। 

वीगरों की शिकायतें 

बीजिंग का आरोप है कि राबिया कदीर समेत निर्वासित वीगर समस्या को बढ़ा रहे हैं। जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्रीय सरकार की नीतियों ने धीरे-धीरे वीगरों के धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को दरकिनार कर दिया।

बीजिंग पर आरोप है कि 1990 के दशक में शिनजियांग में हुए प्रदर्शनों और दोबारा 2008 में बीजिंग ओलंपिक के रन अप के दौरान हुए प्रदर्शनों के बाद सरकार ने दमन तेज कर दिया था। पिछले दशक के दौरान अधिकांश प्रमुख वीगर नेताओं को जेलों में ठूंस दिया जाता रहा या चरमपंथ के आरोप लगने के बाद वे विदेशों में शरण मांगने लगे।

शिनजियांग में चीन के हान समुदाय को बड़े पैमाने पर बसाने की कार्रवाई ने यहां वीगरों को अल्पसंख्यक बना दिया है। बीजिंग पर यह भी आरोप लगा कि इस इलाके में अपने दमन को सही ठहराने के लिए वो वीगर अलगवावादियों के खतरे को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है। 
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बीजिंग का नजरिया

शिनजियांग में चीन ने बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है और साथ ही वहां बड़ी तादाद में सुरक्षा बल भी तैनात किए गए हैं - फोटो : BBC
बीजिंग का नजरिया 

हालांकि बीजिंग ने शिनजियांग में भारी मात्रा में निवेश किया है, लेकिन इसके साथ ही उसने इस इलाके में सुरक्षा बलों का तांता भी लगा दिया है। चीन की सरकार का कहना है कि वीगर चरमपंथी अलग होने के लिए बम हमले, अशांति और तोड़-फोड़ की कार्रवाइयों के मार्फत हिंसक अभियान छेड़े हुए हैं।

अमरीका में 9/11 के हमले के बाद चीन ने वीगर अलगाववादियों को अधिकाधिक रूप से अल-कायदा का सहयोगी सिद्ध करने की कोशिश की है। चीन कहता रहा है कि उन्होंने अफगानिस्तान में प्रशिक्षण हासिल किया है। हालांकि इस दावे के पक्ष में बहुत कम ही सबूत पेश किए जाते रहे। 

अफगानिस्तान पर हमले के दौरान अमेरिकी सेना ने 20 से ज्यादा वीगरों को पकड़ा था। इन्हें बिना आरोप तय किए सालों तक गुआंतानामो में बंदी बनाकर रखा गया और इनमें से अधिकांश इधर-उधर बस गए हैं। 

बड़ा हमला 

साल 2009 की जुलाई में शिनजियांग की प्रशासनिक राजधानी उरुमुची में हुए जातीय दंगों में करीब 200 लोग मारे गए थे। माना जाता रहा है कि इस हिंसा की शुरुआत एक फैक्टरी में हान चीनियों के साथ संघर्ष में दो वीगरों की मुत्यु से हुई। 

चीनी प्रशासन इस अशांति के लिए देश से बाहर के शिनजियांग अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराता है और निर्वासित वीगर नेता राबिया कदीर को दोषी मानता है। चीन का कहना है कि राबिया ने हिंसा भड़काई। हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था।

वीगर निर्वासितों का कहना है कि पुलिस ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी जिसके कारण हिंसा और मौतें हुईं। 

वर्तमान स्थिति 

शिनजियांग को मशहूर सिल्क रूट पर बाहरी चौकी के रूप में शोहरत हासिल है और अभी भी यह हान चीनी पर्यटकों को आकर्षित करता है। शिनजियांग में औद्योगिक और ऊर्जा परियोजनाओं में भारी सरकारी निवेश हुआ है और बीजिंग इनको ही भारी उपलब्धि के रूप में गिनाने में यकीन रखता है।

लेकिन ज्यादातर वीगरों की शिकायत है कि हान उनकी नौकरियों पर कब्जा जमा रहे हैं और उनकी खेती जमीनों को पुनर्विकास के नाम पर जब्त किया जा रहा है। स्थानीय और विदेशी पत्रकारों की गतिविधियों पर सरकार कड़ी निगरानी रखती है और इलाके की खबरों के बहुत कम ही स्वतंत्र स्रोत हैं।

हालांकि, चीन को निशाना बनाकर किए जाने वाले इन अधिकांश हमलों से लगता है कि वीगर अलगाववाद आगे भी और काफी हिंसक ताकत बना रहेगा।
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