चीनी सेना विशेषज्ञों के मुताबिक हॉटलाइट से दोनों सेनाओं के बीच भरोसा पैदा होगा। अखबार ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि भारत-चीन के बीच सैन्य भरोसा द्विपक्षीय रिश्तों के लिए अहम है और यह दोनों पक्षों से धैर्य व ईमानदारी की मांग करता है।
शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के निदेशक झाओ गनचेंग ने कहा, ‘दोनों देशों के बीच तनाव दूर करने के लिए वुहान अनौपचारिक शिखर वार्ता एक अच्छी शुरुआत है जो भविष्य के संवाद और विश्वास बहाली का आधार है। इस बीच शी ने भी चीनी सेना और उसकी कमान के ढांचे में कई बड़े बदलाव किए हैं।
एलएसी पर शांति बनाए रखने का संकल्प
दोनों सेनाओं के बीच वार्षिक अभ्यास बहाल होने की संभावना है। पिछले साल दोकलम गतिरोध के कारण यह अभ्यास नहीं हुआ था। भारत-चीन की सेनाओं ने चुसुल में कल एक बैठक कर एलएसी पर शांति बनाए रखने का संकल्प लिया।
शी और मोदी के बीच पिछले सप्ताह अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इस बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) के दौरान सीमा प्रबंधन के मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें तालमेल करके सीमा पर गश्त लगाने की योजना रखी गई यानी गश्ती दल भेजने के पहले दोनों पक्ष एक-दूसरे को अग्रिम सूचना देंगे।