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एक बच्चा नीति ने दुखाया लाखों का दिल, जानिए इसकी अहम वजह?

Tue, 10 May 2016 12:11 PM IST
लूसी ऐश/बीबीसी न्यूज़, चीन
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पुलिस ने चीन में लाखों लोगों का मन दुखाया - फोटो : BBC
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चीन में एक बच्चा नीति लागू होने के दौरान दूसरे बच्चे की पैदाइश पर नज़र रखने वाली पुलिस ने चीन में लाखों लोगों का मन दुखाया है लेकिन अब उनके पास एक नया काम है। इस साल की शुरुआत में एक बच्चा नीति की समाप्ति के साथ ही ली बो जैसे दूसरे बच्चे की पैदाइश पर नज़र रखने वाले पुलिकर्मियों को अब दूसरी भूमिका निभाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। ली अपने 68 सहकर्मियों के साथ एक पायलट प्रोग्राम का हिस्सा हैं जिसमें शानसी नॉर्मल यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रूरल एजेकुशन एक्शन प्रोग्राम के शिक्षाविद शामिल हैं। उनका नया काम मां-बाप, दादा-दादियों और नाना-नानियों को छोटे बच्चों के दिमाग का विकास करने के तरीकों के बारे में बताना है। वो डैंनफेंग काउंटी में काम करते हैं जो बीजिंग से 1125 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। यह एक उजाड़ क्षेत्र है जहां की आधी से ज्यादा वयस्क आबादी काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुकी है।
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छह करोड़ दस लाख दूसरे बच्चों की तरह ही लाई साइकी के मां-बाप उसके दादा-दादी के भरोसे छोड़कर शहरों में कमाने चले गए हैं। उसकी मां एक नूडल फैक्ट्री में काम करती है जो उनके घर से चार घंटे की दूरी पर है। इसलिए वो अक्सर घर नहीं आ पाती है। उसके पिता एक खदान में काम करते हैं और साल में दो ही बार घर आ पाते हैं। पहले तो उसकी दादी चेन हाउफेन ऐसे छोटे बच्चों की शिक्षा की जरूरत को लेकर उलझन में थीं। वो कहती हैं, "मुझे लगा कि यह समय की बर्बादी है। लेकिन लाई कहानियां पसंद करती है और मुझे अचरज होता है इस बात पर कि उसे कितना याद रहता है।"
साल 1979 में जब एक बच्चा नीति अपनाई गई थी तब चेन किशोरावस्था में थीं। फैमिली प्लानिंग अफसर के बारे में उनसे जानकर मैं भौंचक्का रह गया। उन्होंने मुझे बताया कि पूरा गांव ऐसे अधिकारियों को 'अविश्वास और नफरत' की नज़र से देखता था।
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अगर कोई परिवार दूसरे बच्चे की पैदाइश पर जुर्माना नहीं दे पाता था तो वे उनकी संपत्ति जब्त कर लेते थे। वो बताती हैं, "वे रात में आते थे और एक से ज्यादा बच्चों वाले घर से जो भी हाथ लगा वे सामान उठाकर ले जाया करते थे। फिर चाहे साइकिल हो, सिलाई मशीन हो या गाय और सूअर ही क्यों ना हो।" अगर पहला बच्चा लड़की हो तो कई दूर-दराज के इलाकों में जोड़ों को दूसरा बच्चा पैदा करने की इजाज़त थी। लेकिन चेन का पहला बच्चा एक लड़का था इसलिए जब वो दूसरी बार गर्भवती हुई तो उन्हें गर्भपात करवाना पड़ा था। इसके बाद जब वो फिर से गर्मवती हुई तो वे गुप्त स्थान पर चली गई और वहां एक लड़की को जन्म दिया। लेकिन वो जुर्माने को लेकर डरी हुई थीं। उन्हें अपनी लड़की को छुपा कर रखना था। अगर आप जुर्माना नहीं देते तो सरकार की नज़र में आपके बच्चे का इस दुनिया में कोई अस्तित्व नहीं होता था। 

इसका मतलब यह हुआ कि आपका बच्चा ना स्कूल जा सकता था, ना अस्पताल में भर्ती हो सकता था और यही नहीं ट्रेन का टिकट खरीदने का भी अधिकार नहीं था। चेन बताती हैं, "मेरी बच्ची मेरी मां के साथ पहाड़ियों में 12 साल तक रही। इसके बाद किसी तरह से हमने उसका पंजीकरण करवाया। " 2016 के जनवरी से चीन के सभी जोड़ों को दो बच्चे पैदा करने की इजाज़त मिल चुकी है लेकिन वे अभी भी इससे ज्यादा बच्चे नहीं पैदा कर सकते हैं। इसलिए ली बो को अभी भी कुछ वक्त बच्चों के जन्म पर नज़र रखने के काम में देना पड़ता है। गर्भवती होने लायक सभी महिलाओं का साल भर में चार बार चेकअप किया जाता है कि वे कहीं गर्भवती तो नहीं और स्वस्थ्य है ना। इस साल के शुरूआत से पहले तक अगर कोई दंपत्ति बच्चा पैदा करना चाहता था तो उसे सरकार से इजाज़त लेनी पड़ती थी। जब मैं ली के घर पर उनकी बीवी और नौ साल की बच्ची से मिलने पहुंचा तो उनसे पूछा कि क्या वो दूसरे बच्चे के बारे में सोच रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मेरे मां-बाप खासकर मां बहुत दिनों से दूसरे बच्चे के बारे में कह रही हैं और जुर्माना भरने को तैयार है।


वो दबी हुई जबान में कहते हैं, "मैं दूसरा बच्चा चाहूंगा भले ही हम पैसे को लेकर परेशान क्यों ना हो।" लेकिन ली भी कम्युनिस्ट पार्टी के वफादार सदस्य हैं और इस बात में यकीन करते हैं कि सरकार को ज्यादा अच्छे से पता है कि क्या करना चाहिए और समाज की जरूरतें व्यक्तिगत जरूरतों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। किसी महिला को जो जुर्माना नहीं भर सकती है, गर्भपात करने के लिए कहना उनके लिए वाकई में एक मुश्किल काम है। वो कहते हैं, "चीन बड़ी आबादी की समस्या से जूझ रहा है। हम जोड़ों को समझाते हैं कि ज्यादा बच्चे उनका जीवनस्तर खराब कर देंगे और यह उनके बच्चे के हित में भी नहीं होगा।" कुछ गांवों में तो लोग इन फैमिली प्लानिंग अधिकारियों के कार पर पथराव भी कर देते थे। ली ने भी इस बात को माना है। एक से ज्यादा बच्चे पर लगने वाला जुर्माना चीन में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होता था। अधिकारी आम तौर पर इसे औसत सालाना आय के तीन गुणा से दस गुणा के बीच रखते थे।

नियम तोड़ने की हालत में फैमिली प्लानिंग अधिकारियों के व्यवहार भी अलग-अलग होते थे। बीजिंग और शंघाई के बीच के तटीय क्षेत्र सैंडांग की आबादी नौ करोड़ साठ लाख है। यहां माना जाता है कि क़ानून का पालन ज्यादा कठोर तरीके से किया जाता है। हाल के सालों में यहां अनधिकृत तरीके से बच्चे रखने के आरोपियों को गैर-क़ानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है। यहां के कई परिवार इस बारे में बात करने से कतराते हैं लेकिन एक परिवार बड़ी मुश्किल से अपना अनुभव बताने को तैयार हुआ। 2013 में इस नौजवान की बीवी बिना सरकारी इजाज़त के गर्भवती हो गई थी। इस दंपति के पास पहले से एक लड़की थी।



देहाती क्षेत्रों में इस मामले में छूट मिलने के बावजूद उन्हें दूसरा बच्चा पैदा करने की इजाज़त नहीं थी क्योंकि उनकी पहली जो बच्ची हुई थी, उस वक्त मां की उम्र बीस साल से कम थी। इसलिए परिवार ने यह बात फैमिली प्लानिंग अधिकारियों से छुपा कर रखी थी जब तक कि गर्भ छह महीने का नहीं हो गया। छह महीने के गर्भावस्था के बाद परिवार के लोगों को लगा कि अब अधिकारी गर्भपात कराने के लिए जबरदस्ती नहीं करेंगे। लेकिन वो गलत थे। अधिकारियों ने इस नौजवान को रास्ते में पकड़ लिया और पूछा कि उनकी बीवी कहा है। वो कहते हैं, "मैंने उनसे कहा कि मुझे नहीं पता। इसके बात उन लोगों ने मुझे मारना शुरू कर दिया।" उन्हें एक मिनी वैन में एक होटल में ले जाया गया और वहां भी उनको मारना जारी रखा गया। उनकी बीवी की बहन को भी दबाव बनाने के लिए तीन दिनों तक कैद में रखा गया।

फिर इस नौजवान के मां-बाप को भी हवालात में डाल दिया गया और उन्हें दिखाया गया कि उनके बेटे के साथ क्या किया जा रहा है। उनकी मां ने बताया, "वे मेरे बेटे को ज़मीन पर गिराकर ठोकरे मार रहे थे। मैं ज्यादा देर इसे बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपनी बहू को बुलाकर बच्चे का मोह छोड़ देने को कहा।" मैंने देखा कि उनकी बहू आस्तीन से अपने आंसू पोछ रही हैं और उनका बेटा दुखी और शर्मिंदा दिख रहा है। चूंकि उन्हें हिरासत में लेना गैर-क़ानूनी था इसलिए मैंने उन लोगों से पूछा कि उन्होंने पुलिस को बताया है। नौजवान के पिता ने बताया, "मैंने स्थानीय पुलिस को फोन किया लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि मैं फैमिली प्लानिंग अधिकारियों के काम में दखल नहीं दे सकता। वे बहुत ताकतवर लोग हैं। वो जो चाहते हैं सो करते हैं।" चीन में अब दो बच्चों की इजाज़त है। यह उनके लिए थोड़ी तसल्ली की बात है लेकिन इस नौजवान का कहना है, "हमने जो खोया है उसे भरा नहीं जा सकता।" एक बच्चे की नीति का चीन में तीखा इतिहास रहा है। इसने लाखों चीनी परिवारों का दिल दुखाया है। आज देश की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं है कि आबादी अधिक है बल्कि घटती श्रम-शक्ति है जो भविष्य के लिए ख़तरा है।
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