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नीरव मोदी और विक्रम कोठारी जैसों के साथ क्या करता है चीन?

Tue, 20 Feb 2018 06:22 PM IST
बीबीसी हिंदी
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विजय माल्या, नीरव मोदी और अब विक्रम कोठारी, देश या सरकारी बैंकों को करोड़ों का चूना लगाकर मुकरने या भागने वालों की कहानी सामने आती है तो दिमाग में सबसे पहले सवाल आता है कि ऐसों के साथ क्या किया जाना चाहिए।
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बड़े घोटाले करने वालों के नाम सामने आते हैं तब खबर होती है कि कितना नुकसान हो गया। लेकिन बैंकों के डूबे हुए कर्ज (NPA) के आंकड़े इशारा करते हैं कि उधार लेकर डकार जाना भारतीयों की बड़ी दिक्कत है। पंजाब नेशनल बैंक कार्रवाई कर रहा है तो नीरव मोदी ने धमकी दी है कि इन सारी खबरों ने उनके ब्रांड को नुकसान पहुंचाया है।

ऐसों के साथ क्या किया जाए, इसका एक हल हमें पड़ोसी देश चीन से मिल सकता है। चीन की सुप्रीम पीपल्स कोर्ट ने हाल में 67 लाख से ज्यादा बैंक डिफॉल्टरों को काली सूची में डाल दिया है। इसका मतलब ये कि वो विमान से सफर नहीं कर सकते, लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर सकते और उन्हें प्रमोशन भी नहीं मिलेगा।
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ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक अब तक चीनी सरकार ने 61.5 लाख लोगों को विमान टिकट खरीदने और 22.2 लाख लोगों के तेज रफ्तार रेलगाड़ियों में सफर करने पर पाबंदी लगा दी है। सुप्रीम पीपल्स कोर्ट के एंफोर्समेंट ब्यूरो चीफ मेंग जियांग ने बताया कि कोर्ट ने आधिकारिक आईडी और पासपोर्ट की मदद से एयरलाइन और रेल कंपनियों के साथ सहयोग शुरू कर दिया है।

मेंग ने बताया कि कोर्ट ने जिन डिफॉल्टर्स को ब्लैकलिस्ट किया है, उनमें सरकारी नौकर, स्थानीय विधायिका और राजनीतिक सलाहकार संस्थाओं के सदस्य और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनके अलावा कुछ ऐसे भी हैं जिनका डिमोशन कर दिया गया है और इस कड़ी कार्रवाई का क्या असर हुआ? कम से कम दस लाख डिफॉल्टर्स ने खुद ही अदालत का आदेश मानने की बात कही है।

बिजनेस इनसाइडर की पिछले साल दिसंबर की एक खबर के मुताबिक चीन ऐसी पब्लिक ब्लैकलिस्ट रखता है जो कर्ज डकारने वालों की आवाजाही और सामान खरीदने तक पर पाबंदी लगाता है। देश की सबसे बड़ी अदालत अपनी वेबसाइट पर 'बेईमान लोगों' के नाम और आईडी नंबर छापती है। ये लोग न तो विमान और हाई-स्पीड रेलगाड़ी में सफर कर सकते हैं बल्कि उनके बच्चे भी महंगे स्कूलों में नहीं पढ़ सकते।

डिफॉल्टर तीन-सितारा या उससे ज्यादा महंगे होटलों में ठहर नहीं सकते। इसके अलावा अगर वो सिविल सर्विस से जुड़ना चाहते हैं तो उन्हें मुश्किल परीक्षा से गुजरना होता है। कार बुक कराने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना होता है।

ये पाबंदियां आईडी नंबर के जरिए लगाई जाती थीं। कुछ लोगों ने सफर करने पर लगी रोक से बचने के लिए अपने पासपोर्ट इस्तेमाल करने शुरू किए, लेकिन अब वो खामी भी दूर कर दी गई है। ये लिस्ट साल 2013 में शुरू की गई थी और उस समय इसमें 31 हजार से ज्यादा नाम थे। तब से दिसंबर, 2017 तक इसमें करीब 90 लाख लोग जुड़े।
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साल 2017 की शुरुआत में चीन में एक ऐसे ही कर्जदार के पहले दर्जे से विमान सफर करने पर 15 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया गया था। डिफॉल्टर पर कार्रवाई को लेकर इतना खौफ है कि एक व्यक्ति ने बचने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करा ली थी। यही नहीं ब्लैकलिस्ट में जो नाम जुड़ जाते हैं, उससे रोजगार की संभावनाओं पर भी असर पड़ता है।

कई कंपनियां इसकी जांच करती हैं और लिस्ट में शामिल डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को कार्यकारी पद नहीं दिए गए हैं। इस साल की शुरुआत में चीन की कोर्ट ने एक बयान में कहा था, ''ऐसी उम्मीद है कि रोजमर्रा की जिंदगी में इस तरह की दिक्कतें पैदा करने से कर्जदारों को वक़्त रहते उधार लौटाने की आदत पड़ेगी।''

पिछले साल अगस्त में चीन के सिचुआन प्रांत की अदालत ने 20 कर्जदारों के फोन पर रिकॉर्ड मैसेज डाल दिए थे। जब कोई ऐसे डिफॉल्टर कर्जदार को फोन करता है तो आवाज आती, ''जिस व्यक्ति को आप कॉल कर रहे हैं, उसे अदालतों ने उधार न चुकाने के कारण ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया है। कृपया इस आदमी को कानूनी देनदारी का सम्मान करने का आग्रह कीजिए।''

चीन भर के बैंक डिफॉल्टर के नाम, आईडी नंबर, फोटोग्राफ और घर का पता अब अखबारों में छापा जा सकता है, रेडिया या टीवी पर दिखाया जा सकता है। इसके अलावा बसों और लिफ्ट में भी चस्पा किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय सरकारों को भी नेम एंड शेम डाटाबेस तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसे कोई भी सर्च कर सके। इसका मकसद है नाम लेकर शर्मसार करना, ताकि कर्ज न चुकाने वाले लोगों से वसूली की जा सके।

चीन में ये प्रक्रिया पुरानी है। साल 2015 में कोर्ट ने निजी कंपनियों के साथ काम करना शुरू कर दिया था। ये कंपनियां अदालत की तरफ से लगने वाले जुर्माने पर डिफॉल्ट करने वाले लोगों के क्रेडिट पॉइंट काट लेती थीं।
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