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CPEC पर बैकफुट पर चीन, प्रोजेक्ट को बचाने के लिए बलूच आतंकियों पर डाले डोरे

Tue, 20 Feb 2018 03:13 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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CPEC Project
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करीब 60 अरब डॉलर से भी अधिक का निवेश करके पाकिस्तान में बनाए जा रहे चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की सुरक्षा को लेकर चीन ने गोपनीय रूप से बलोच आतंकियों के साथ बातचीत की है। ब्रिटिश समाचार पत्र फायनेंशियल टाइम्स (एफटी) ने इस गुप्त वार्ता का खुलासा करते हुए कहा है कि बातचीत से जुड़े तीन लोगों ने बीजिंग के बलूचिस्तान आतंकियों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क की जानकारी दी है।

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पाक के इस प्रांत में सीपीईसी परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पड़ता है जिसका बलोच नागरिकों के बीच जबरदस्त विरोध हो रहा है। पाक अधिकारियों ने एफटी से कहा कि चीन ने इस मसले पर बेहद ही खामोशी के साथ बड़ी प्रगति की है। अगर यह सही है तो चीन की राजदूत के इस बयान को पूरे मामले की पुष्टि समझा जाएगा जिसमें याओ जिंग ने पिछले दिनों कहा था कि बलोच आतंकी संगठन अब सीपीईसी के लिए कोई खतरा नहीं हैं। जबकि बलोच एक्टिविस्टों का आरोप रहा है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर बलूचिस्तान की डेमोग्राफी बदलने के मकसद से काम कर रहे हैं।

पाक पर अवैध रूप से बलूचिस्तान में कब्जा करके बलोचों पर अत्याचार का आरोप भी है। एक पाक अधिकारी ने एफटी को बताया कि पाकिस्तान में बलोच विद्रोहियों और चीन के बीच इस बातचीत का स्वागत किया गया है। इस्लामाबाद के एक अन्य अधिकारी ने यहां तक कहा कि यदि बलूचिस्तान में शांति होती है तो यह दोनों के लिए बेहतर होगा। दरअसल, वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत चीन एशिया व यूरोप के 60 देशों को आपस में जोडऩे जा रहा है। कुल 124 अरब डॉलर के इस फंड में पाक होकर गुजरने वाला चीन सीपीईसी इसी परियोजना का हिस्सा है। 

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चीन को घेरेंगे भारत, अमेरिका और आस्ट्रेलिया

trump modi
पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में चीन के लगातार बढ़ते हस्तक्षेप के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और पाकिस्तान के बीच खराब होते संबंधों को माना जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पाक आगे होकर चीन के लिए उसकी राह में आने वाले हर कांटे को हटाकर चीन को उपकृत करना चाहता है। बता दें कि अमेरिका ने पाक को दी जाने वाली दो अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता राशि रोक दी है, क्योंकि पाक अपनी जमीन से आतंकियों की पनाहगाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

उधर, भारत को वन बेल्ड एंड वन रोड की काट के लिए अमेरिका का साथ मिल गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक प्रोजेक्ट अभी बातचीत के स्तर पर और शुरुआती चरण में है। इस हफ्ते के आखिर में होने वाले अमेरिकी दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पीएम मैल्कन टर्नबुल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मुद्दे पर बात करेंगे।

अमेरिकी अधिकारियों ने ऑस्ट्रेलिया फाइनेंस रिव्यू रिपोर्ट के हवाले से बताया कि चारों देश संयुक्त क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे की योजना शुरू करना चाहते हैं, जो चीन की अरबों डॉलर महत्वाकांक्षी योजना ओबीओआर जैसी हो। इसका मकसद क्षेत्र में बढ़ते चीन के प्रभाव से निपटना है। 
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