प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय गतिविधियों के कारण चीन की महान दीवार धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर है। हालत यह है कि यूनेस्को विश्व विरासत स्थलों में शुमार चीन की इस महान दीवार की लोगों ने अपने घर बनाने के लिए ईंटें तक चुरा ली हैं।
सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस महान दीवार का अब तक तकरीबन 30 फीसदी हिस्सा लुप्त हो चुका है। ऐसा नहीं है कि इस दीवार के कुछ ही हिस्से टूट-फूट का शिकार हुए हों, बल्कि इसके हजारों किलोमीटर तक में दरारें आ चुकी हैं।
यह दीवार पूर्वी तट के शैहाईगुआन से गोबी मरुस्थल के दूरदराज तक फैले इलाके के शियायुगुआन तक जाती है। इस दीवार की पूरी लंबाई नौ हजार से लेकर 21 हजार तक मानी जाती है, जिसमें अंतरिक्ष से दिखने वाले कुछ गायब हिस्से भी जोड़कर बताए जाते हैं। जबकि हकीकत में यह दीवार अब उतनी लंबी नहीं रह गई है।
धूप, हवा, पानी भी जिम्मेदार
अखबार ने पिछले साल ग्रेट वॉल ऑफ चाइना सोसाइटी द्वारा कराए एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा है दीवार के कुछ हिस्सों को हवा-पानी और धूप की वजह से भी नुकसान पहुंचा।
जबकि पेड़-पौधों के अपनी जडे़ं जमाने की वजह से भी दीवारों को काफी नुकसान में तेजी आई।
सर्वे करने वाली सोसायटी के वाइस प्रेसीडेंट डांग याओहुई ने कहा, ‘भले ही ये दीवारें ईंट और पत्थरों से बनी हों, मगर वे साल भर हवा और पानी का मुकाबला नहीं कर सकते।’
उन्होंने बताया कि दीवार पर बने हुए बहुत से टॉवर बेहद कमजोर हो चुके हैं और कई तो गर्मियों में साधारण बारिश में ही ढह गए।
पर्यटन ने भी पहुंचाया नुकसान
पर्यटन और स्थानीय निवासियों की गतिविधियों के चलते इंसान द्वारा बनाई गई दुनिया के सबसे लंबे निर्माण को काफी नुकसान पहुंच रहा है।
सरकारी समाचार एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, रास्ते में पड़ने वाले गरीब गांवों के लोग अपना घर बनाने के लिए इस महान दीवार की ईंटें भी चुरा लिए।
जबकि ईंटें चुराने पर पांच हजार युआन का जबरदस्त जुर्माना भी है।
तीसरी ईसवी पूर्व में शुरू हुआ था निर्माण
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दीवार का निर्माण पहली बार तीसरी सदी ईसा पूर्व में शुरू हुआ था, मगर बाद में मिंग राजाओं के शासनकाल (1368-1644 ईसवी) में 6,300 किलोमीटर की दीवार बनाई गई।
जिसका काफी बड़ा हिस्सा राजधानी बीजिंग से होकर गुजरता है।
बीजिंग टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि जैसे-जैसे सदियां गुजरती गईं, उसी के साथ इस दीवार का 1962 किलोमीटर का हिस्सा ढह गया।