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चीन का अमेरिका को जवाब 'हम नहीं डरते किसी से'

Sun, 05 Jun 2016 04:03 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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दक्षिण चीन सागर- फाइल फोटो - फोटो : BBC
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अमेरिका-चीन का हमेशा 36 का आंकड़ा रहता है। दोनों देशो की तरफ से जारी बयानबाजी हमेशा से चर्चा में रहती है। दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर अमेरिका की प्रतिक्रिया के बाद चीन ने अमेरिका को चेतावनी दे डाली। चीन ने अमेरिका की ‘उकसावेबाजी’ पर हमला बोलते हुए कहा कि दक्षिण चीन सागर में पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवादों से अगर कोई ‘गड़बड़ी’ पैदा होती है तो उसे कोई परवाह नहीं है। 
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सिंगापुर में सुरक्षा सम्मेलन में चीन के एडमिरल सुन जिआनगुओ ने कहा, 'बाहर के देशों को इस विवाद कि स्थिति में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए, नाकि नकारात्मक। दक्षिण चीन सागर का मुद्दा कुछ देशों द्वारा अपने स्वार्थी फायदों के कारण भड़काए जाने से जरूरत से ज्यादा गर्म हो गया है।'

अमेरिका के रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर के दक्षिण चीन सागर द्वीप पर चीनी निर्माण को लेकर चेतावनी देने के एक दिन बाद सन का यह बयान सामने आया है।गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर पर फिलीपीन्स का दावा रहा है और वह अमेरिका एवं अन्य देशों से इस संबंध में तुरंत ‘कार्रवाई’ चाहता है। चीनी एडमिरल ने कहा, ‘हम गड़बड़ी पैदा नहीं करते, लेकिन हमें इसका कोई डर भी नहीं है।’
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पेंटागन के प्रमुख कार्टर ने कहा था कि विवादित जल क्षेत्र में अपना सैन्य विस्तार करने से चीन खुद को अकेला करने का जोखिम ले रहा है। इसके साथ ही, ऐसी विकट स्थिति के खतरे को कम करने के लिए उन्होंने चीन के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग का भी प्रस्ताव रखा। चीनी एडमिरल ने अमेरिका पर ‘शीत युद्ध’ की मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका देश इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।

उन्होंने कहा, 'मैं दोहराना चाहता हूं कि दक्षिण चीन सागर पर हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा। चीन इस मुद्दे का हल शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से निकालना चाहता है। हम यह भी विश्वास करते हैं कि जिन देशों के साथ हमारा विवाद है उनमें भी चीन के साथ शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने धैर्य व समझदारी है।

हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन, फिलीपींस से 230 किमी की दूरी पर स्कारबोरो शोल में एक चौकी स्थापित करने का प्लान बना रहा है। चीन इस क्षेत्र को अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा मानता है। मनीला के मुताबिक चीन ने 2012 से स्कारबोरो शोल पर अपना नियंत्रण स्थापित कर रखा है। हालांकि कार्टर ने बीजिंग की प्रक्रिया के जबाब में कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है।
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