दक्षिण चीन सागर पर अधिकार को लेकर आए फैसले को चीन ने मानने से मना करने के बाद इस समुद्री भाग में अपनी संप्रभुत्ता बचाने की तैयारी में चीन जुट गया है। चीन ने कहा कि वो दक्षिण चीन सागर एयर डिफेंस जोन को बनाएगा। आपको बताते चले कि मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने चीन के दक्षिण चीन सागर के कब्जे को लेकर चीन के खिलाफ फैसला दिया है।
चीन के सरकारी मीडिया ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल को विदेशी ताकतों के हाथ का मोहरा बताया है। चीन ने इसके लिए अमेरिका को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अमेरिका यहां पर समस्याएं खड़ा कर रहा है। आपको बताते चले कि दक्षिण चीनी समुद्र में वियतनाम, फिलीपींस, मलयेशिया, ब्रुनेई और ताइवान ने अपना हक जताया था।
चीन की कम्युनस्टि पार्टी के अधिकारिक समाचार पत्र पीपुल्स डेली ने अपने पहले पन्ने पर लिखा कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी संप्रभुत्ता को बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। यह हमारे लिए सीमाओं और अपने हितों के बचाव का सवाल है।
दक्षिण चीन सागर को वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा व्यापारिक रूट बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती शक्तियों का टकराव भी दक्षिणी चीनी समुद्र पर कब्जे की एक प्रमुख वजह है। यहां पर दोनों ही देश रणनीतिक और आर्थिक तौर एक दूसरे से टकराव कर रहे हैं।
खबरें यहां तक आ गई हैं कि इस विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन दो नए एयरपोर्ट बनाने भी जा रहा है। चीन के उपविदेश मंत्री ल्यू जेनमिन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन एयर डिफेंस जोन बनाएगा। यह हम पहले ही बता देना चाहते हैं कि इस पर हमारा हक है। उन्होंने साफ करते हुए कहा कि दक्षिणी चीनी समुद्र में सामने आने वाली चुनौतियों को देखकर हम फैसला करेंगे।
उन्होंने यह भी साफ किया कि दूसरे देश इस फैसले को चीन को डराने के लिए प्रयोग में लाएं। साथ ही दूसरे देशों को उम्मीद करते हैं कि चीन के साथ मिलकर काम करेंगे। दूसरे देशों को साफ-साफ चेतावनी देते हुए कहा कि दक्षिणी चीनी समुद्र को युद्ध का जरिया न बनाएं।