चीन अपने देश के उइगर मुस्लिमों को लेकर हमेशा दुनिया भर की सुर्खियां बटोरता है । इस बार भी उइगर मुस्लिमों के साथ अपने अजीबो गरीब सवैये को लेकर चीन चर्चा में है।चीन उइगर मुस्लिमों को देशभक्त और वफादार बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर चला रहा है। चीनी सरकार ने विशेष ट्रांसफॉर्मेशन कैंप खोले हैं। ये कैंप उइगर मुसलमानों को अपनी सरकार और वहां की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार बनाने के लिए खोले गए हैं।
आश्चर्य की बात ये है कि उइगर मुसलमानों पर पाकिस्तान अपनी सीमा के एकदम नजदीक हो रहे अत्याचार की खबरों पर चुप बैठा है। जबकि भारत में मुसलमानों पर कथित आत्याचार को लेकर वो झूठा प्रचार करता है और दुनिया में हाय तौबा मचाता है।पाकिस्तान ही नहीं अन्य मुस्लिम देश भी इस मुद्दे पर बिल्कुल खामोश हैं ।सिर्फ पश्चिमी मानवाधिकार संगठन ही इस अत्याचार पर आवाज उठाते हैं।
क्यों हैं उइगर मुस्लिमों पर पाबंदी
चीन ने उइगर मुस्लिमों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश कई साल पहले लगा दिया गया था।'कोई भी धर्म कानून से बड़ा नहीं होता' कहते हुए हाल ही में चीन की सरकार ने वहां की एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था। 2014 में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। इससे पहले 2014 में शिनजियांग की सरकार ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के रोजा रखने और मुस्लिम नागरिकों के दाढ़ी बढ़ाने पर रोक लगा दी गई थी। चीन अपनी सोच को लेकर इस कदर कट्टर है कि उसने कई बार अपने बयान में कहा है कि धार्मिक गतिविधियां देश के कानून के तहत ही होनी चाहिए।
उइगर कब-कब हुए अत्याचार के शिकार