निया के कई देशों की तरह चीन में भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं का यौन उत्पीड़न एक समस्या है। इसी तरह की छेड़छाड़ से परेशान चीन के ग्वांगझाओ की एक महिला ने जब अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाने की गुहार लगाई।
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लेकिन जब अधिकारियों ने मदद से इनकार कर दिया तो महिला ने खुद ही अपना एक अनोखा अभियान शुरू कर दिया। लीली झेंग याद करती हैं कि जब वो किशोरावस्था में थी तब एक व्यक्ति ने पब्लिक बस में उनका हाथ पकड़ लिया, उन्हें घूरा और उन्हें वहां से जाने से रोकने लगा।
उनका सालों पहले का ये एक भयानक अनुभव था। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने लोगों में जागरुकता फैलाने का फैसला किया। यौन उत्पीड़न विरोधी विज्ञापन के पैसे जुटाने के लिए क्राउड फंडिग अभियान शुरू किया, जो चीन में शायद इस तरह का पहला विज्ञापन होगा।
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अधिकारियों से सपोर्ट नहीं मिला
लीली पहले अपने शहर ग्वांगझाओ के अधिकारियों के पास गईं, लेकिन उन्होंने इस तरह के विज्ञापन लेने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि इससे जनता में घबराहट बढ़ने का डर था।
लीली ने तय किया कि वो खुद ही एक चलता फिरता विज्ञापन बन जाएंगी। गुलाबी बालों और गुलाबी कपड़ों में वो खुद को "वीयर्डो" यानी एक अजीब सी शख्सियत के तौर पर पेश करती हैं।
वो गले में एक बिलबोर्ड डालकर सार्वजनिक जगहों पर घूमती हैं, इस बिलबोर्ड पर सार्वजनिक परिवहन में होने वाले यौन उत्पीड़न से आगाह करने वाला संदेश है।
'ये बहाना है, जबरन छूना बंद करो'
लीली ने ऐसे 100 बिलबोर्ड प्रिंट करवाए और इस मामले में समर्थन मांगते हुए एक अनुरोध किया- किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में या उसके आसपास इनके साथ तस्वीर खींचकर पोस्ट कर दें।
विज्ञापन में एक बिल्ली एक सुअर को रोकते हुए कह रही है 'नहीं।' इसमें लिखा है- 'आकर्षण एक बहाना है, जबरन छूना बंद करो।' हैशटैग #Iamabillboardonthemove और #Walkingagainstsexualharassment ने ट्विटर जैसी चीनी सोशल साइट वीबो पर ट्रेंड करना शुरू कर दिया, लोगों ने इस मुद्दे पर अपने अनुभव शेयर करने शुरू कर दिए। लीली का कहना है कि लोगों की प्रतिक्रियाओं से उन्होनें चीन के बारे में बहुत कुछ जाना। लीली ने इस बारे में लोगों का साथ हुए अनुभवों की कुछ कहानियां भी बताईं-
शी बीजिंग में बिलबोर्ड के साथ घूमीं
"मैंने बिलबोर्ड के साथ लोगों को जोड़ने के 34 प्रयास किए लेकिन असफल रही, मुझे लगा मैं रो दूंगी। एक आदमी ने तो मुझ से कहा- " मैं एक पुरूष हूं आप मेरे पास क्यों आ रही हैं?
या फिर कुछ ने कहा- "ऐसा नहीं लगता कि इस मुद्दे पर मुझसे बात करना कुछ अनुचित है?" एक ने तो ऐसा जाहिर किया जैसे उसने बिलबोर्ड को देखा ही नहीं और हाथ से मुझे आगे जाने का इशारा किया। मैं लोगों से बातचीत करने में अच्छी हूं लेकिन मुझे लगता कि ये काम मुझे और साहसी बना देगा।"
छात्रा हू को अफसोस कि वो इस मुद्दे पर कभी नहीं बोली
"मैं यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर खड़ी होना चाहती हूं और दूसरी महिलाओं को भी इस मामले पर बोलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगी, क्योंकि मुझे अफसोस है मैं अपने अनुभव को लेकर चुप रही।
पिछले साल जब एक रात बारिश हो रही थी, एक आदमी ने भरी बस में मेरे पैरों पर अपने हाथ रगड़े। मैं वहां से हट गई फिर भी वो मेरे पैरों को छूता रहा। मैं चिल्लाई नहीं, क्योंकि मैं बहुत डर गई थी। मैं अकेली थी और मुझे डर था कि अगर बस में मैंने उसके बारे में बोला तो वो हमला करेगा।"
"खचाखच भरी शंघाई मेट्रो में बिलबोर्ड लेकर खड़े रहना बेहद मुश्किल है। भीड़भाड़ वाले घंटो में तो मैंने बिलबोर्ड लगभग तोड़ ही दिया था। मुझे लगा चमकीले पीले रंग के बोर्ड को लेकर खड़े होने से लोगों का ध्यान इस पर जाएगा, लेकिन मैं ग़लत थी। हर कोई अपने फोन की स्क्रीन से चिपका हुआ था। मैं ब्रिटेन में पढ़ी हूं और मैं जानती हूं कि प्रदर्शन करना और हड़ताल करना साधारण बात है। तो मुझे शंघाई में घूमकर अपनी बात लोगों तक पहुंचाने पर गर्व है।"
अभियान का अब क्या होगा?
जून में लीली पूरे महीने में अलग अलग इलाकों से आई तस्वीरों और कहानियों को इकट्ठा कर चीन के परिवहन मंत्रालय को भेजेंगी। साथ ही ग्वांगझाओ के स्थानीय परिवहन अधिकारियों पर अभियान को आगे बढ़ाने के लिए दबाव बनाएंगी। लीली को कुछ विरोध का भी सामना करना पड़ा, जैसे चीन के पब्लिक मैसिजिंग प्लेटफॉर्म वीचैट से उनके अभियान का लेख रहस्यमय ढंग से डिलीट हो गया।
सवाल है कि इन स्वयंसेवी लोगों की मदद से वो कितना प्रभावशाली अभियान चला पाएंगी? लीली कहती हैं- "हालांकि मेरी कोशिशें छोटी लग सकती हैं, लेकिन इस पर मुझे भरोसा है।" उनका कहना है कि वॉलेंटियरों के जो अनुभव और कहानियां उन्होने देखी हैं, वो साबित करती हैं कि अभियान कितने ही छोटे स्तर पर क्यों ना हो, ये जारी रखने योग्य है।