चीन अब अपने दरवाजे भारतीय टेक्नोक्रेट्रस के लिए खोलने जा रहा है। इससे अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों को अपने देश में नौकरी देना और उनका इस्तेमाल करके दुनिया का सबसे बड़ा टेक्नीकल हब बनने की तैयारी कर रहा है।
हाल ही में चीन की सरकारी मीडिया ने अपनी सरकार को सलाह देते हुए कहा था कि वो भारत के हाईटेक टैलेंट को अपने देश में काम करने का मौका दे, जिससे देश को आईटी सेक्टर में नया इनोवेशन करने में आसानी हो सके।
भारतीयों पर भरोसा जताकर के संबंधों को सुधारना चाहता है चीन
चीन की इस नई पॉलिसी से दोनों देशों के संबंधो में सुधारना चाहता है, जो कि पिछले कुछ दिनों से काफी नीचे चले गए थे। चीन चाहता है कि भारत में मौजूद हाई टेक टैलेंट को यहां पर बुलाया जाए ताकि भारतीयों के बल पर वो दुनिया का सबसे बड़ा तकनीकी हब बन सके।
चीन का मानना है कि अमेरिका में जारी एच1बी वीजा विवाद के बाद कई सारे भारतीय देश छोड़ सकते हैं, जिनका इस्तेमाल चीन अपने यहां कर सकता है।
चीन का मानना है कि रिसर्च और इनोवेशन में भारतीयों का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। इस टैलेंट का आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। अभी चीन में जो भारतीय काम कर रहे हैं वो ज्यादातर बिजनेस में हैं।
अब चीन चाहता है दुनिया में उसका नाम सस्ते सामान बनाने वाले देश से बदलकर विश्व के सबसे बड़े तकनीक आधारित देश में बदल जाए।