चीन ने सोमवार को तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े हवाई टर्मिनल की शुरुआत कर दी। तिब्बत में स्थित यह टर्मिनल भारतीय सीमा के बेहद करीब है। नव निर्मित यह हवाई अड्डा लगभग 10 हजार वर्ग किमी के दायरे में फैला हुआ है।
खबरों के मुताबिक साल 2020 तक यह तकरीबन 7.5 लाख यात्रियों और 3 हजार टन माल संभालने लायक हो जाएगा। यह तिब्बत में बना छठा एयरपोर्ट है। न्यिंगची दक्षिण-पूर्व तिब्बत में स्थित है जिसकी समुद्र तल से औसत ऊंचाई 2,950 मीट है। इसकी भौगोलिक स्थिति अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद करीब है।
चीन तिब्बत में कई तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसके कारण भारत की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पहले चीन ने तिब्बत में रेल यातायात को मजबूत किया अब वह हवाई यातायात को मजबूत करने में जुटा हुआ है। ड्रैगन की इस योजना को देखते हुए भारत ने भी सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण अरुणाचल प्रदेश के इलाकों में काम करना शुरू कर दिया है। पिछले साल भारतीय वायु सेना ने अपने सबसे बड़े माल वाहक जहाज हरकुलीस 130जे को सफलता पूर्वतक उतरा था।
नवनिर्मित टर्मिनल न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट का भाग है। इससे निश्चित तौर पर चीनी को लाभ मिलेगा। निन्गची मेनलिंग में साल दर साल इस यात्रियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। साल 2006 में साल 2016 में 3.90 लाख यात्री इस एयरपोर्ट के जरिए यात्रा कर चुके हैं। नए टर्मिनल के शुरु होने से न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा।