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भारत से डरे चीन ने कहा, 'सीमाओं पर बढ़ रहा खतरा'

Sun, 02 Aug 2015 10:21 AM IST
एजेंसी/बीजिंग
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दक्षिण चीन सागर और भारत, म्यांमार जैसे देशों के साथ लगती अपनी सीमाओं पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाने को लेकर ड्रैगन ने शनिवार को सफाई दी है।
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उसने कहा है कि उसके आसपास के समंदर और सीमाओं पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है, जिस वजह से टकराव के हालात पैदा हो गए हैं।

इसीलिए हाल के वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी उसकी सेना ने अपने अत्याधुनिकीकरण के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए हैं। क्षेत्र में अपनी पकड़ कायम रखने के लिए चीन ने हाल के दिनों में अपने रक्षा खर्चों में काफी बढ़ोतरी की है।

वातावरण बेहद जटिल-चीन

उसने कहा है कि मौजूदा हालातों में फिलहाल अपने साजोसामान को अत्याधुनिक करने की जरूरत है, ताकि अपनी रक्षा की जा सके।

चीन की सेना के आधिकारिक मुखपत्र के मुताबिक, दुनिया अप्रत्याशित तौर पर बदलाव से गुजर रही है। हमारे देश के इर्द-गिर्द हालात बदतर होते जा रहे हैं। खतरे और चुनौतियां बढ़ रही हैं। यही नहीं दिनोंदिन टकराव के हालात बनते जा रहे हैं।

अखबार कहता है, ‘समुद्री सुरक्षा का वातावरण बेहद जटिल हो चुका है और पूर्व व दक्षिण चीन सागरों में हालात ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं।’

भारतीय सीमा पर असहज है चीन

चीन का पूर्वी चीन सागर में कई द्वीपों को लेकर जापान के साथ विवाद चल रहा है, वहीं दक्षिण चीन सागर में भी जल क्षेत्र पर दावे को लेकर वियतनाम, फिलीपींस, ताइवान, मलयेशिया और ब्रुनेई से भी तनातनी चल रही है।

सेना के अखबार ने कहा है कि राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखंडता और विकास हित मुश्किल में हैं। अखबार ने चीन के रक्षा मंत्री चांग वैनकुआन के हवाले से कहा है कि चीन शांति के लिए सेना की तैनाती को प्रतिबद्ध है, मगर अहम मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

चीन को एक ओर जहां अफगानिस्तान से अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता रहा है, वहीं कोरियाई द्वीपीय देशों के साथ युद्ध की आशंका भी बनी हुई है।

म्यांमार और भारत के साथ जहां सीमा विवाद को लेकर उसे अस्थिरता का खतरा लगता रहा है। ताइवान के साथ भी उसके रिश्ते असहज रहे हैं।
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सुरक्षा परिषद में सुधार की राह में आडे़ आया चीन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की भारत की कवायद पर पानी फिर सकता है। बीते एक दशक से जी-4 के राष्ट्र (भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान) सुरक्षा परिषद में सुधार करने की मांग करते रहे हैं।

ये देश चाहते हैं कि इस बारे में संयुक्त राष्ट्र में बाकायदा एक लिखित प्रस्ताव लाया जाए, मगर इसमें उन्हें सीमित सफलता ही हासिल हो पाई है।

जमैका ने इस बारे में एक लिखित अंतरसरकारी समझौता तैयार करने का वादा किया, मगर उससे पहले ही चीन ने इस लिखित प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया है।
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