चीन ने हाल में अफगान तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। उसकी यह पहल अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आतंकी संगठन को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का हिस्सा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने मंगलवार को तालिबान सूत्रों के हवाले से खबर दी कि पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल अफगान तालिबान के कतर दफ्तर के प्रमुख शेर अब्बास सतानीकजई के नेतृत्व में पिछले महीने चीन गया था।
उनके अलावा दल में मौलवी शहाबुद्दीन दिलावर, जान मोहम्मद मदानी, सलाम हनाफी और सलेह शामिल थे। एक तालिबान प्रतिनिधि ने कहा, ‘दुनिया का एक बड़ा ताकतवर मुल्क होने के नाते चीन अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है। इसी कारण उसने तालिबान को आमंत्रित किया था।’ तालिबान प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा के कुछ दिन बाद चीन के विशेष दूत डेंग शिजुन ने काबुल का दौरा किया और राष्ट्रपति अशरफ गनी समेत कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी।
डेंग ने बताया कि चीन ने तालिबान से साफ कहा है कि बीजिंग अफगान सरकार और राष्ट्रपति को मान्यता देता है और वार्ता ही उनके लिए एकमात्र विकल्प है। गौर करने वाली बात यह है कि चीन, पाकिस्तान और रूस के वरिष्ठ राजनयिकों की मॉस्को में अहम बैठक के बाद तालिबान के प्रतिनिधियों ने चीन का दौरा किया। मॉस्को बैठक में तालिबान लीडरों पर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा हुई थी।