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पीएम मोदी के चीन पहुंचने से पहले चीनी सेना ने दिखाई नरमी, भारत के साथ संबंधों पर टैगोर को याद किया

Fri, 27 Apr 2018 12:16 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सिक्किम सीमा के पास भारतीय सेना के साथ संबंधों के तनावपूर्ण रहने के महीनों बीत जाने के बाद, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने गुरुवार को दोनों देशों के विकास के बारे में बात करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया। 
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पीएलए के प्रवक्ता वू कियान ने कहा, "चीन और भारत पड़ोसी हैं जिनकी जगह को बदला नहीं जा सकता है। प्राचीन आदान-प्रदान और पारस्परिक समझ के बारे में ऐतिहासिक तथ्य हैं। यहां विकास की उम्मीद बरकरार है।" 

"मुझे याद है कि जब राष्ट्रपति शी (जिनपिंग) ने भारत का दौरा किया था, तो उन्होंने एक कहानी सुनाई कि 90 साल से भी पहले, भारतीय कवि टैगोर ने चीन का दौरा किया और चीनी लोगों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया था।" 
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प्रसिद्ध कवि का हवाला देते हुए वू ने कहा, "जैसे ही उन्होंने चीन की भूमि पर पैर रखा, टैगोर ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि क्या कारण है। चीन लौटना मेरे लिए घर लौटने जैसा है। 

वू ने बताया कि टैगोर ने कहा था, "मेरा दिल यहाँ है।"

उन्होंने कहा, "यह दोनों देशों के लोगों की इच्छा है कि चीनी और भारतीय सेना के बीच संबंध स्थिर हों और सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द कायम हो सके।" 

सीमा पर दोनों देशों के जवानों के बीच 73 दिनों तक गतिरोध बरकरार रहा।

वू ने स्वीकार किया कि दोनों सेनाओं के संबंध में "अभी भी कुछ कठिनाइयां और बाधाएं" हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग द्वारा विकसित सर्वसम्मति "हमारी समझ को गहरा बनाने के लिए दिशानिर्देश" के रूप में काम आएगी। 

इस बीच, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को ऐलान किया कि 2018 की पहली तिमाही में भारत के साथ व्यापार 22 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "साल 2017 के आखिर तक, भारत में चीनी निवेश 8 अरब डॉलर से ज्यादा तक बढ़ा है, क्योंकि चीनी कंपनियों के लिए बुनियादी ढांचे के सहयोग के लिए भारत एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया है और निवेश का प्रमुख गंतव्य है।"

अधिकारी ने कहा कि यह प्रगति पिछले साल देखी गई उछाल की रफ्तार से जारी है, जब द्विपक्षीय व्यापार 2016 से 20.3 फीसदी बढ़कर 84.4 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
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