ये है चीन में पीएम मोदी का कार्यक्रम
पीएम मोदी की यात्रा की शुरुआत शुक्रवार को भारतीय समयानुसार दोपहर करीब पौने एक और चीनी समयानुसार साढ़े तीन बजे होगी। हुवई प्रोविंसियल म्यूजियम में शी जिनपिंग पीएम का स्वागत करेंगे। शुक्रवार की रात ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में जिनपिंग की मेहमान नवाजी में पीएम रात्रि का भोजन करेंगे। शनिवार को ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में ही पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बातचीत होगी। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों नेता बोट राइडिंग करेंगे। उसके बाद लंच का भी इंतजाम किया गया है।
मोदी का कहना है कि वह राष्ट्रपति जिनपिंग से द्विपक्षीय एवं वैश्विक महत्व के कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा एवं भावी परिस्थितियों के मद्देनजर राष्ट्रीय विकास को लेकर अपने दृष्टिकोण एवं प्राथमिकताओं पर भी बात करेंगे। चीन के उप विदेश मंत्री कांग जुआनयू ने कहा कि दोनों नेता आपसी विश्वास बहाल करने और बकाया मुद्दों को हल करने पर सहमति कायम करने की कोशिश करेंगे। सूत्रों के अनुसार यह बैठक मुद्दा आधारित नहीं होगी बल्कि यह दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे के नजरिए को समझने के लिए एक रणनीतिक वार्ता होगी।
शी जिनपिंग करेंगे मोदी का अभूतपूर्व स्वागत
चीन के उप विदेश मंत्री कांग जुआनयू ने कहा है कि चीन अपने स्वागत से भारत को चौंका देगा। मोदी का शानदार रेड कार्पेट स्वागत होगा। कांग के मुताबिक वुहान शहर के अनौपचारिक माहौल को इसलिए चुना गया है ताकि दो दोस्तों के बीच दिल से दिल की बात हो सके।
पहली बार किसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए निकलेंगे बीजिंग से बाहर
यह पहली बाहर होगा जब शी जिनपिंग किसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए दो दिन तक राजधानी बीजिंग से बाहर रहेंगे। इससे पहले केवल बहुपक्षीय सम्मेलनों में हिस्सा लेने जिनपिंग बीजिंग से बाहर गए हैं। यह पहली द्विपक्षीय वार्ता है जो बीजिंग से बाहर होगी। इस मुलाकात पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, जिनपिंग का मोदी के स्वागत के लिए बीजिंग से बाहर जाना अपने आप इस यात्रा के महत्व के बारे में बताता है।
पूरे दो दिन मोदी के साथ रहेंगे
जिनपिंग इस यात्रा के दौरान दो दिन मोदी के साथ कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वह खुद ही मोदी का स्वागत भी करेंगे।
मोदी ने जिनपिंग को झुलाया था झूला
सितंबर, 2014 में शी जिनपिंग की भारत यात्रा के समय मोदी उन्हें अपने गृह नगर अहमदाबाद ले गए थे। तीन दिन की यात्रा के दौरान वह महात्मा गांधी के विश्व प्रसिद्ध साबरमती आश्रम गए। जहां जिनपिंग ने चरखा चलाया तो साबरमती रिवर फ्रंट पर मोदी ने उन्हें अपने हाथों से झूला भी झुला दिया था। जिनपिंग इस सम्मान को भूले नहीं होंगे।
वुहान का चुनाव क्यों
शीर्ष नेताओं की अनौपचारिक वार्ता के लिए वुहान के चुनाव के पीछे कई वजहें हैं। यांगत्सी नदी के किनारे बसा मध्य चीन का यह शहर अपनी झीलों और पार्कों के लिए मशहूर है और अनौपचारिक वार्ता के लिए माकूल माहौल मुहैया कराएगा। इसके अलावा, चीन के महान नेता माओ त्से तुंग इसी शहर में झील के किनारे बने अपने भव्य आवास में विदेशी नेताओं से मिला करते थे। चीनी अधिकारियों के अनुसार इसकी बड़ी वजह यह है कि मोदी अपनी पिछली यात्राओं में चीन के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के शहरों की यात्रा कर चुके हैं लेकिन कभी उन्होंने मध्य चीन के किसी शहर को नहीं देखा है।