डोकलाम सीमा विवाद के बाद चीन को एक और करारा झटका लगा है। ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले चीन को एक और मुद्दे पर भारत के सामने झुकना पड़ा है। भारत के कड़े विरोध के बाद ब्रिक्स समूह के विस्तार की योजना चीन को मजबूरन छोड़नी पड़ी।
'ब्रिक्स प्लस' योजना का विरोध
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बीजिंग अपनी 'ब्रिक्स प्लस' योजना के बारे में समूह के दूसरे देशों को यकीन दिला पाया। जिसके चलते चीन को मजबूरन अपनी ब्रिक्स प्लस योजना छोड़नी पड़ी। बता दें कि भारत पहले से ही चीन की 'ब्रिक्स प्लस' की योजना का विरोध करता रहा है।
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अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित
चीन ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए मिस्र, केन्या, ताजिकिस्तान, मेक्सिको और थाईलैंड को अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित किया है लेकिन ये स्पष्ट भी कर दिया है कि ये निमंत्रण उसके 'ब्रिक्स प्लस' रुख के तहत समूह को विस्तार देने का प्रयास नहीं है।
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इससे पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ब्रिक्स प्लस के बारे में और अधिक व्याख्या करने की जरूरत है ताकि लोग इसके पीछे के तर्क को अच्छी तरह समझ पाएं।
कई मायनों में अहम है पीएम मोदी का चीन दौरा
ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के पहले सप्ताह में चीन जाएंगे। डोकलाम समाधान के ठीक बाद पीएम मोदी का यह दौरा कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है। चीन भी इस बात को बखूबी समझता है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से ठीक पहले चीन ने भारत को लेकर कहा कि दोनों देशों में आपसी सहयोग को लेकर काफी संभावनाएं हैं।