चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी की अहम बैठक के दौरान कहा कि ताइवान में आजादी को लेकर हो रहे बदलावों का हर हाल में विरोध करेंगे। बता दें कि शी जिनपिंग ये बात कम्युनिस्ट पार्टी की नेशनल पीपल्स कांग्रेस की अहम सालाना बैठक के दौरान कही। हफ्ते भर चली इस बैठक की समाप्ति पर दिए अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने ताइवान की आजादी के विरोध का एलान किया। नेशनल पीपल्स कांग्रेस की बैठक के दौरान ही शी जिनपिंग को तीसरी बार चीन का राष्ट्रपति चुना गया है। ऐसे में कह सकते हैं कि तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले संबोधन में जिनपिंग ने ताइवान को लेकर बड़ा बयान दिया है।
शी जिनपिंग ने सोमवार को दिए अपने बयान में चीन को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और ताइवान के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने की बात भी कही। नेशनल पीपल्स कांग्रेस की बैठक के दौरान ही शनिवार को ली कियांग को चीन का नया प्रीमियर या प्रधानमंत्री बनाया गया। चीन में राष्ट्रपति के बाद प्रीमियर के पद पर आसीन व्यक्ति ही दूसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति होता है। ली कियांग ने ली केकियांग की जगह ली है जो लगातार दस सालों तक इस पद पर रहे।
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सरकार के अन्य अहम पदों पर भी शी जिनपिंग ने अपने करीबी सहयोगियों को जगह दी है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना के गवर्नर के पद पर यी गांग बने रहेंगे। वहीं चीन के वित्त मंत्री पद पर भी लियु कुन बरकरार रहेंगे। शी जिनपिंग की सरकार ने 2023 में विकास दर को बढ़ाकर 5 फीसदी करने का भी लक्ष्य तय किया है, जो कि बीते साल तीन फीसदी था।
बता दें कि ताइवान के मुद्दे पर चीन और अमेरिका में बीते काफी समय से तनाव बढ़ रहा है। बीते साल जब अमेरिका की पूर्व स्पीकर नैंसी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया था तो चीन इस बात से बेहद नाराज हुआ था और चीन ने ताइवान की घेराबंदी करते हुए युद्धाभ्यास किया था। अब शी जिनपिंग के ताइवान की आजादी के लिए हो रहे बदलावों का विरोध करने का एलान बड़ी बात है।
चीनी सेना को ‘ग्रेट वॉल ऑफ स्टील’ बनाने का संकल्प लिया
चीन के राष्ट्रपति के रूप में अपने अभूतपूर्व तीसरे कार्यकाल की शुरुआत करते हुए शी जिनपिंग ने चीनी सेना को ‘ग्रेट वॉल ऑफ स्टील’ (फौलादी दीवार) बनाने का सोमवार को संकल्प लिया। चीन ने हाल में सऊदी अरब और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी करके वैश्विक मामलों में और बड़ी भूमिका निभाने की मंशा का संकेत दिया है। चीन की संसद ने गत शुक्रवार को शी को अभूतपूर्व रूप से पांच साल का तीसरा कार्यकाल देने का सर्वसम्मति से समर्थन किया, जिससे उनके ताउम्र सत्ता में बने रहने का रास्ता साफ हो गया। पिछले साल अक्तूबर में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की कांग्रेस की बैठक में 69 वर्षीय शी को फिर से सीपीसी का नेता चुना गया था। इसी के साथ शी सीपीसी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद पांच साल के तीसरे कार्यकाल के लिए पार्टी प्रमुख चुने वाले पहले चीनी नेता बन गए थे।