चीन को चित करने के लिए अब यूरोपीय संघ और अमेरिका साथ आएंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने ब्रूसेल्स फोरम के दौरान शुक्रवार को यह जानकारी दी। पोंपियो ने ट्वीट किया, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चीन कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ आपस में बातचीत को तैयार हैं।
पोंपियो ने इस दौरान भारत चीन सीमा के पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के दुस्साहस का भी जिक्र किया। यहां एक हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए। पोंपियो ने कहा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियां से अमेरिका समेत कई देशों के नागरिकों की सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने कहा, दशकों में ट्रंप प्रशासन पहला है जिसने इस खतरे को गंभीरता से लिया है।
यूरोपीय संघ कोरोना संकट के चलते यूरोप में प्रवेश के प्रतिबंधों को कम करने की दिशा में काम कर रहा है। यूरोपीय संघ के राजनयिक ने बताया कि किन देशों को यूरोप में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जाएगी इसको लेकर संघ के अधिकारी काम में जुटे हैं और अगले हफ्ते के अंत तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हालांकि तेजी से बढ़ते मामलों के कारण अमेरिकी लोगों पर प्रतिबंध जारी रहने की उम्मीद है। इस सूची को तैयार करने में संबंधित देश में कोरोना के मामलों और यूरोपीय देशों के प्रतिबंध नियमों को ध्यान में रखा जाएगा।