चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) परियोजना को लेकर ऋण जाल और क्षेत्रीय आधिपत्य जमाने जैसी वैश्विक चिंताओं को कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनकी महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना यानी बीआरआई पहल कोई "विशेष क्लब (समूह) नहीं है" और इसमें पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाएगी।
शी ने 'बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ)’ की दूसरी बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि चीन "मुक्त, हरित और स्वच्छ सहयोग" के आधार पर अपनी अरबों डॉलर की बेल्ट एवं रोड पहल (बीआरआई) का निर्माण करना चाहता है।
इस बैठक में 37 देशों के प्रमुख के अलावा 150 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
भारत ने बीआरआई की सीपीईसी परियोजना को लेकर फोरम की बैठक का बहिष्कार किया है। दरअसल, 60 अरब डॉलर से तैयार होने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरेगा। भारत इसका विरोध कर रहा है। यह बीआरआई की प्रमुख परियोजना है।
इस बार भारत की तरह अमेरिका ने भी खुद को बैठक से दूर रखा है।
अमेरिकी सरकार बीआरआई को लेकर काफी गंभीर है और उसका मानना है कि चीन बेल्ट एंड रोड मुहिम के जरिये छोट देशों को ‘ऋण के जाल’ में फंसा रहा है।
जिनपिंग ने "ऋण जाल" और महाशक्ति का दर्जा हासिल करने के लिए बीआरआई का इस्तेमाल संबंधी आलोचनाओं का जवाब देते हुए कि यह पहल "कोई विशेष क्लब नहीं है।"
उन्होंने कहा, "इसमें सब कुछ पारदर्शी तरह से होना चाहिए और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
शी ने कहा कि चीन अपनी मुद्रा रॅन्मिन्बी की विनिमय दर तय करने की प्रणाली में सुधार करना जारी रखेगा और विनिमय दर को उचित और संतुलित बनाए रखेगा।
जिनपिंग ने कहा कि बेल्ट एंड रोड पहल ने सुयंक्त निर्माण विश्व की आर्थिक वृद्धि के लिए नए द्वार खोले हैं और इस पहल ने अंतराष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नया मंच भी तैयार किया है।
उल्लेखनीय है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में सत्ता में आने के बाद बीआरआई परियोजना को शुरू किया था। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को सड़क एवं समुद्र मार्ग से जोड़ेगी।