अपने फैसलों से दुनिया को चकित करने का सिलसिला जारी रखते हुए चीन की एक सरकारी कंपनी ने 5जी तकनीक से संबंधित एक बड़ा ठेका अपने यहां की चर्चित कंपनी हुवावे को नहीं दिया। इसकी जगह उसने ये ठेका एक अमेरिकी कंपनी को दिया है। हुवावे कंपनी का चीन में व्यापक नेटवर्क है। अब से पहले सरकारी कंपनियां इसी को अपना ठेका देती थीं। जब से अमेरिका ने चीन के साथ चल रहे अपने व्यापार युद्ध के क्रम में हुवावे कंपनी को निशाना बनाया, चीन में घरेलू कंपनियों को और तरजीह दी जा रही है। अब तक हुवावे को चीन की सरकारी टेलीकॉम कंपनियों- चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम से सभी बड़े ठेके मिलते थे।
लेकिन अब चाइना मोबाइल ने हुवावे के टेंडर को नजरअंदाज करते हुए अपना एक बड़ा ठेका अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी क्वैलकॉम को दे दिया है। चाइना मोबाइल के साढ़े 94 करोड़ ग्राहक हैं। ताजा ठेका 5जी नेटवर्क के और विस्तार के लिए दिया गया है। क्वैलकॉम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुवावे की प्रतिस्पर्धी कंपनी समझा जाता है। ऐसे में चीन की सरकारी कंपनी का ठेका उसे मिलने से अंतरराष्ट्रीय जानकार चकित हैं।
चाइना मोबाइल ने 2021 और 2022 में अपने 5जी नेटवर्क की क्षमताओं में बढ़ोतरी की योजना बनाई है। इसके लिए उसने टेंडर आमंत्रित किए थे। इस दौरान 5जी के तीन लाख 20 हजार आधुनिक उपकरणों की चाइना मोबाइल खरीदारी करेगी। अपनी इन योजनाओं से संबंधित तमाम ठेके उसने क्वैलकॉम और उसकी सहयोगी कंपनियों को दे दिए हैं। हुवावे को इस दौरान एक भी ठेका नहीं मिला।
वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण हुवावे को काफी नुकसान हुआ है। 5जी के लिए जरूरी अति आधुनिक मॉडम और मल्टी बैंड अल्ट्रा फास्ट कनेक्शन सपोर्ट की तकनीक में वह क्वालकॉम से पिछड़ गई है। ऐसे में चाइना मोबाइल्स को आशंका थी कि हुवावे को ठेका देने पर उसका नेटवर्क पिछड़ जाएगा। कुछ दूसरी रिपोर्टों में बताया गया है कि हुवावे के पास अभी जितने ठेके हैं, उनकी डिलीवरी में वह पिछड़ी हुई है। इसलिए खुद वह चाइना मोबाइल से ताजा ठेका पाने की होड़ से हट गई।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस साल के पहले छह महीनों में हुवावे की मुनाफे में 29.4 फीसदी की गिरावट आई थी। इसकी वजह उसकी कस्टमर यूनिट में 13.7 फीसदी की गिरावट है। पिछले नवंबर में इस कंपनी ने अपने एक प्रतिष्ठित फोन ब्रांड को बेच दिया था।
पिकिंग यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर एरिक मेर ने एशिया टाइम्स को बताया कि 5जी नेटवर्क आधुनिक मॉडेम और दीर्घकालिक निवेश पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर चाइना मोबाइल से ठेका पाने में हुवावे नाकाम रही, तो उसका मतलब है कि उसे कई दूसरी कंपनियों के ठेके भी गंवाने पड़ेंगे। इससे अगले तीन से पांच साल के बीच उसके राजस्व में भारी गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि इस समय चीन अपने घरेलू उद्योगों को समर्थन देने की नीति पर चल रहा है। लेकिन इसके लिए वह अपने उत्पादन और आविष्कार क्षमता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता। इसलिए जहां से भी सर्वोत्तम तकनीक हासिल होगी, उसे अपनाने की नीति पर वह चल रहा है।