चीन ने अपनी महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष परियोजना के तहत शेनझोउ-18 (Shenzhou-18) लॉन्च किया है। इस परियोजना के तहत चीन के तीन अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन टियांगोंग भेजा गया है। खबर के मुताबिक चीन 2030 तक इंसान को चांद पर भेजना चाहता है।
चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना शेनझोउ-18 के तहत तीन सदस्यीय चालक दल को अंतरिक्ष में भेजा गया है। इस परियोजना के तहत यात्रियों को निचली-पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया है। बता दें कि चीन 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सहत पर भेजना चाहता है। गुरुवार तो तीनों यात्रियों को जिउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से अंतरिक्ष में भेजा गया। चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी (सीएमएसए) ने जिन तीन लोगों को अंतरिक्ष में भेजा है, उनमें एक का नाम 43 वर्षीय कमांडर ये गुआंगफू है। गुआंगफू एक अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं, जो 2021 के शेनझोउ-13 मिशन का हिस्सा रह चुके हैं। उनके साथ 34 वर्षीय ली कांग और 36 वर्षीय ली गुआंगसु पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजे गए हैं।
विज्ञापन
तीन सदस्यीय चालक दल वाला अंतरिक्ष यान देश के उत्तर-पश्चिम में गोबी रेगिस्तान के किनारे से लॉन्च किया गया। जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से रात करीब 8:59 बजे (1259 GMT) लॉन्च हुआ। चीनी परियोजना से जुड़ी खबरों के मुताबिक तीनों अंतरिक्ष यात्रियों के टियांगोंग स्पेस स्टेशन पहुंचने के बाद शेनझोउ-17 टीम को राहत मिलेगी। शेनझोउ-17 टीम पिछले अक्तूबर से ही चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन कर रही है।
तीन सदस्यीय दल अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग छह महीने बिताएगा। सीएमएसए के उप निदेशक लिन ज़िकियांग के अनुसार, चीनी अंतरिक्ष यात्रियों का दल वैज्ञानिक परीक्षण करेगा। अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष मलबे का संरक्षण उपकरण स्थापित कर, पेलोड प्रयोग करेगा। लिन ने यह भी कहा कि चीन विदेशी अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष पर्यटकों को अपने अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है।
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर किए जाने के बाद चीन ने अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाया। इसका मुख्य कारण कार्यक्रम में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी - चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सैन्य शाखा की भागीदारी को लेकर अमेरिका की चिंताएं थीं। चीन ने 2003 में अपना पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन चलाया। ऐसा करने पर चीन सोवियत संघ और अमेरिका के बाद अपने संसाधनों का उपयोग करके किसी व्यक्ति को अंतरिक्ष में भेजने वाला तीसरा देश बन गया।