पीएम मोदी हाल ही में अमेरिका अपनी पहली राजकीय यात्रा पर गए थे, इस बीच भारत और अमेरिका के बीच कुछ सौदों पर समझौते हुए जिसमें सैन्य विमानों को शक्ति देने के लिए भारत में जेट इंजन का संयुक्त उत्पादन और सशस्त्र ड्रोन पर एक सौदा शामिल है। अब इन सौदों को लेकर चीन को मिर्ची लग गई है, उसने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि भारत अमेरिका के बीच सहयोग से क्षेत्रीय शांति पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दो देशों के बीच सैन्य सहयोग से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता कमजोर नहीं होनी चाहिए। किसी रक्षा सौदे से किसी तीसरे पक्ष के हितों को भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
मीडिया ने उसने पीएम मोदी की यात्रा के दौरान हुए कई रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों के बारे में सवाल किया था तो उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि संबंधित देश क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के क्षेत्र में क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी विश्वास के अनुकूल काम करेंगे।
अमेरिका से घातक ड्रोन खरीदेगा भारत
जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस ने घोषणा की है कि उसने भारतीय वायु सेना के हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए)-एमके-द्वितीय तेजस के लिए संयुक्त रूप से लड़ाकू जेट इंजन बनाने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ एक समझौता किया है। साथ ही भारत ने जनरल एटॉमिक्स से सशस्त्र रीपर ड्रोन खरीदने की घोषणा की। ड्रोन से भारत की खुफिया निगरानी और क्षमताओं को बढ़ेगी।
चीनी सीमा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रीपर ड्रोन
एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी तैनाती हिंद महासागर, चीनी सीमा के साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। करीब 29 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे से भारत को 30 लड़ाकू ड्रोन मिलेंगे। इनमें से 14 नौसेना और आठ-आठ वायुसेना और सेना को मिलेंगे।