चीन के अधिकारियों ने बुधवार को जोर देते हुए कहा कि तिब्बत में दलाई लामा के लिए कोई समर्थन नहीं है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि तिब्बती लोग कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से उन्हें खुशनुमा जिंदगी दिए जाने के लिए शुक्रगुजार हैं। यह सप्ताह तिब्बत के सर्वोच्च धार्मिक गुरु दलाई लामा के भारत में शरण लिए जाने की 60वीं सालगिरह के तौर पर मनाया जा रहा है।
बता दें कि तिब्बत को ‘शांति से मुक्त कराया गया हिमालयी क्षेत्र’ कहने वाले बीजिंग पर इस क्षेत्र में राजनीतिक और धार्मिक दमन का आरोप लगता रहा है। हालांकि चीन दावा करता रहा है कि तिब्बती अपनी व्यापक स्वतंत्रता से खुश हैं और इससे क्षेत्र का आर्थिक विकास होने का दावा करते रहे हैं। तिब्बत पार्टी के अध्यक्ष वू यिंगजी ने कहा कि छोड़कर जाने के बाद दलाई लामा ने तिब्बतियों के लिए एक भी अच्छा काम नहीं किया है। वू ने यह बात चीन की वार्षिक संसदीय बैठक से इतर यहां पर कही।
आंकड़े नहीं करते इस बात का समर्थन
चीन भले ही तिब्बतियों के खुश होने की बात करता हो, लेकिन आंकड़े उसका समर्थन नहीं करते हैं। वर्ष 2009 से अब तक तकरीबन 150 तिब्बती युवक बीजिंग की अपने देश में उपस्थिति के खिलाफ आग लगाकर आत्मदाह कर चुके हैं। चीन ने 2002 में दलाई लामा के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन 9 दौर की वार्ता के बाद 2010 में यह वार्ता बंद हो गई थी।
अधिकतर लोगों का मानना था कि चीन इस वार्ता के जरिए महज टाइमपास कर रहा था, क्योंकि उसे उम्मीद है कि दलाई लामा के निधन के बाद उसके ऊपर तिब्बत को लेकर बन रहा अंतरराष्ट्रीय दबाव खत्म हो जाएगा। नोबेल पुरस्कार विजेता दलाई लामा 83 साल के हो चुके हैं और उनके फैन पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं। बहुत सारे तिब्बती बौद्ध यह भी खतरा जता चुके हैं कि दलाई लामा की मृत्यु के बाद चीन उनके ऊपर अपनी पसंद से किसी को दलाई लामा घोषित कर सकता है।