भारत और चीन के बीच हुए सीमा समझौते और सैनिकों के विवादित पॉइंट्स से पीछे हटने को लेकर चीन की ओर से जवाब आया। चीनी सेना ने कहा कि सैनिक पूर्वी लद्दाख सीमा पर टकराव वाले बिंदुओं से पीछे हटने को लेकर हुए समझौते पर काम रहे हैं। अभी यह प्रक्रिया पूरा नहीं हुई। समझौते के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल झांग शियाओगांग ने कहा कि चीन और भारत कूटनीतिक, सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों का समाधान कर रहे हैं।
चीन के रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों के पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और देपसांग में टकराव बिंदुओं से सेना की वापसी पूरी होने की बात पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। कर्नल झांग ने कहा कि इस सवाल पर मेरे पास देने के लिए और कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि चीन और भारत को द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। उन्हें यह तय करना चाहिए कि विशिष्ट मुद्दों के मतभेदों का समग्र संबंधों पर असर न पड़े।
सीमा क्षेत्र में शांति और सौहार्द की रक्षा करेगा भारत
चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष चीन के साथ मिलकर दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण आम सहमति को मार्गदर्शन मानेगा और उनको लागू करेगा। साथ ही सीमा क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की संयुक्त रूप से रक्षा करेगा। वहीं भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों के सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग मैदानों में दो टकराव बिंदुओं पर वापसी पूरी कर ली है और इन बिंदुओं पर जल्द ही गश्त शुरू होने वाली है। सेना के पीछे हटने के बाद सत्यापन प्रक्रिया जारी है और ग्राउंड कमांडरों के बीच गश्त के तौर-तरीकों पर फैसला किया जाना है। स्थानीय कमांडर स्तर पर बातचीत होती रहेगी।
21 अक्तूबर को भारत चीन के बीच सीमा समझौते का हुआ था एलान
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में एलान किया कि पिछले कई हफ्तों से चल रही बातचीत के बाद भारत और चीन के बीच एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया है और इससे 2020 में उठे मुद्दों का समाधान निकलेगा। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त और सैनिकों के पीछे हटने पर समझौते को अंतिम रूप दिया गया, जो चार साल से चल रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
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