US-China Conflict: अमेरिका का मानना है कि रूस से तेल खरीदने से उसे यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिलती है। वहीं, चीन इस दलील को खारिज करता रहा है और बार-बार यह दोहराता रहा है कि वह ऊर्जा खरीद को राजनीतिक हथियार नहीं बनने देगा। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की उस चेतावनी पर कड़ा जवाब दिया है जिसमें कहा गया था कि अगर चीन ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा, तो उस पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है। चीन ने साफ कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता रहेगा।
टैरिफ युद्ध में किसी की जीत नहीं होती- चीन
विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, 'चीन हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। टैरिफ युद्ध में किसी की जीत नहीं होती। जबरदस्ती और दबाव की नीति से कुछ हासिल नहीं होता। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास से जुड़े हितों की मजबूती से रक्षा करेगा।'
अमेरिका-चीन के बीच तनावपूर्ण माहौल
अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से ही व्यापार, सुरक्षा और तकनीक के मुद्दों पर तनावपूर्ण हैं। वहीं अमेरिका का मानना है कि रूस से तेल खरीदने से उसे यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिलती है। वहीं, चीन इस दलील को खारिज करता रहा है और बार-बार यह दोहराता रहा है कि वह ऊर्जा खरीद को राजनीतिक हथियार नहीं बनने देगा। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।