चीन की सरकार दुनिया भर में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए पहले कमजोर देशों को कर्ज मुहैया कराती है, फिर उनसे जुड़ी सूचनाओं में हेरफेर करती है और बाद में उन पर कब्जा करने की नीति अपनाती है। हाल ही में एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ कमजोर लोकतंत्र वाले देशों ने चीन की इस रणनीति के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं जबकि ताइवान समेत कुछ देश आक्रमकता से जवाब दे रहे हैं।
इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (आईआरआई) ने चीन के प्रभाव, चीन की रणनीति और अन्य देशों के साथ उसके व्यवहार पर विश्लेषण करते हुए 'ए वर्ल्ड सेफ फॉर द पार्टी: चाइना ऑथोरिटियन इन्फ्लुएंस एंड द डेमोक्रेटिक रिस्पांस' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने दुनिया भर में कमजोर देशों का हितैषी बनकर खुद फायदा उठाया है।
चीन अपनाता है यह रणनीति
चीन का कहना है कि कर्ज लेकर गरीब देश विकास कर सकेंगे। जबकि इसके इतर उसकी रणनीति एकदम विपरीत होती है। दरअसल, गरीब देश इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर चीन से पैसे लेते हैं, लेकिन जब ये देश समय पर उधार नहीं चुका पाते हैं, तब चीन उन पर दबाव बनाकर उनके किसी बंदरगाह को लीज पर ले लेता है। या फिर उनकी आंतरिक राजनीति में दखल देने लगता है ताकि उसका फायदा उठाया जा सके। चीन यह रणनीति पड़ोसी देश पाकिस्तान समेत ज्यादातर गरीब देशों के साथ अपनाता है।
रिपोर्ट में चीन के प्रभाव को लेकर किए गए विश्लेषण में नेपाल, जॉर्जिया, ग्रीस और मोंटेनेग्रो को भी शामिल किया गया है। वहीं इसमें केन्या और पनामा पर गहन विश्लेषण किया गया है।
बता दें कि अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के कई शीर्ष सांसदों ने चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने और अमेरिका की महत्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा को लेकर एक दर्जन से अधिक विधेयक कांग्रेस में पेश किए हैं। अमेरिका और चीन के बीच अनेक मुद्दों पर मतभेद हैं। अमेरिका के नेता समय-समय पर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताते रहे हैं। विधायक गुरुवार को पेश किए गए हैं।