चीन में सत्ता और सेना के भीतर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सालाना संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की संसद ने सेना से जुड़े नौ वरिष्ठ सांसदों को पद से हटा दिया है। आधिकारिक तौर पर इसे प्रशासनिक फैसला बताया गया है, लेकिन लगातार हो रही कार्रवाइयों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चीन में सत्ता पूरी तरह एक व्यक्ति के नियंत्रण में जाती दिख रही है। संसद सत्र से पहले उठाया गया यह कदम राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या विरोध की आवाजों पर कार्रवाई हो रही है?
लगातार सैन्य अधिकारियों को हटाने और जांच की कार्रवाई ने चीन की राजनीति को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार विरोधी अभियान नहीं बल्कि सत्ता के भीतर संभावित विरोध को खत्म करने की रणनीति भी हो सकती है। चीन में सत्ता संरचना पहले ही काफी केंद्रीकृत मानी जाती है और अब सेना पर सीधा नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
संसद सत्र में क्या होंगे बड़े फैसले?
चार मार्च से शुरू होने वाले संसद सत्र में चीन की आर्थिक नीति, सैन्य रणनीति, व्यापार और कूटनीतिक दिशा से जुड़े बड़े फैसले सामने आएंगे। इसी दौरान चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना को मंजूरी दी जाएगी, जो वर्ष 2030 तक देश की नीति दिशा तय करेगी। ऐसे अहम सत्र से पहले सेना और संसद में बदलाव यह संकेत देता है कि नेतृत्व किसी भी असहमति से पहले व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रित रखना चाहता है।