महिलाओं में आई नई जागरूकता की एक मिसाल यह है कि सोशल मीडिया पर आज महिलाएं दब्बू स्त्रियों का मजाक उड़ाती दिखती हैं। चीन में नारीवादी आंदोलन की एक प्रमुख हस्ती शियाओ मिली ने एक वेबसाइट से कहा कि कई ऐसी अभिव्यक्तियां भी होती हैं, जिनमें मैरिड डंकी यानी विवाहित गधा कहकर दब्बू स्त्रियों को अपमानित किया जाता है। शियाओ ने कहा कि इस तरह का निजी हमला गलत है।
लेकिन इससे यह जाहिर होता है कि आज बहुत सी महिलाएं विवाह को लेकर बहुत सख्त राय रखती हैं। वे चाहती हैं कि हर महिला ये समझे कि विवाह व्यक्तिगत रूप में और महिला के रूप में उनके लिए एक अन्यायपूर्ण संस्था है। इसलिए ये महिलाएं विवाह से खुद को दूर रख रही हैं। बता दें कि शियाओ चीन में काफी चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बाल यौन उत्पीड़न संबंधी कानून में सुधार की मांग को लेकर 2000 किलोमीटर की पदयात्रा की थी।
मगर विवाह दर में गिरावट से चीन के लिए समस्या खड़ी हो रही है। अब चीन सरकार लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उसे इस बात का भान है कि अगर आबादी इसी तरह गिरती रही, तो चीन की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। देश के नागरिक मामलों के मंत्री यांग जोंगताओ ने पिछले साल एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि विवाह और प्रजनन एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
विवाह दर मे गिरावट का असर जन्म दर पर पड़ेगा। उसका असर आर्थिक और सामाजिक विकास पर पड़ेगा। उन्होंने कहा था कि सरकार अब ऐसी सामाजिक नीति बनाएगी और जागरूकता अभियान चलाएगी, जिससे लोगों में प्यार, विवाह और परिवार को लेकर सकारात्मक भावना पैदा हो सके। साल 2019 ऐसा लगातार छठा वर्ष रहा, जब चीन में विवाह दर में गिरावट आई। 2018 की तुलना में 2019 में इसमें 6.6 प्रतिशत की कमी आई। 2019 में चीन में विवाह दर 14 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
जानकारों का कहना है कि चीन ने 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी अपनाई थी और उसका अब बुरा असर जाहिर हो रहा है। तब चीन ने जनसंख्या घटाने के लिए ये नीति अपनाई और उसे बेहद सख्ती से लागू किया। जनसंख्या विशेषज्ञ लंबे समय से इस नीति के संभावित खराब असर की चेतावनी दे रहे थे। चीन में 2014 में ऐसा पहली बार हुआ, जब कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या में गिरावट आई।
अगले साल यानी 2015 में चीन सरकार ने वन चाइल्ड पॉलिसी में बदलाव का एलान किया, जिसे एक जनवरी 2016 से लागू किया गया। लेकिन इसके पहले विवाह दर और जन्म दर दोनों में गिरावट आने की शुरुआत हो चुकी थी। 2019 में प्रति 1000 लोगों पर सिर्फ 13 बच्चों ने जन्म लिया।
इसी बीच महिलाओं के विवाह के प्रति नजरिए में आए बदलाव ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि विवाह दर में गिरावट अकेले चीन की समस्या नहीं है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के समाजशास्त्री जुन जीन येउंग ने एक टीवी चैनल से कहा कि धनी देशों में यह ट्रेंड दशकों से देखा जाता रहा है। पश्चिमी देशों, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे पूर्व एशियाई देशों आदि की तुलना में चीन में अभी भी विवाह दर ज्यादा है।
जुन ने कहा कि चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी के कारण स्थिति ज्यादा गंभीर है। उस नीति पर जब अमल हो रहा था, तो उस दौरान लोग बेटों को प्राथमिकता देते थे। खासकर ऐसा ग्रामीण इलाकों में ऐसा होता था। इस कारण समाज में लड़कियों की संख्या बहुत घट गई है। आज चीन में महिलाओं की तुलना में तीन करोड़ ज्यादा पुरुष हैं। इसलिए दुल्हन ढूंढना भी एक कठिन काम हो गया है।