चीन का जुरोंग रोवर शनिवार से बुधवार के बीच मंगल ग्रह की सतह पर उतरेगा। चीन के लिए इस मिशन को बेहद अहम माना जा रहा है। चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि तियानवेन-1 करीब 10 फरवरी को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के बाद से काफी महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र की हैं।
इसके जरिए ही ग्रह पर बर्फीले यूटोपिया का पता लगाया जा सकेगा। जुरोंग नाम चीन के अग्नि देवता के नाम पर रखा गया है। ये रोवर चीन के अंतरिक्ष यान ‘तियानवेन-1’ की बेली में लगा हुआ है। वह रोवर और लैंडर के लिए लगातार सतह की मैंपिंग कर रहा था।
अमेरिका नौ बार रहा है सफल
अमेरिका इससे पहले सफलता पूर्वक नौ बार अपने अंतरिक्ष यान को मंगल ग्रह पर उतार चुका है। यही नहीं, वह ग्रह पर यान के संचालन में भी सफल रहा है। अमेरिका के मंगल मिशन की शुरुआत विकिंग से 1976 में हुई थी। नासा ने फरवरी में अपने परसिवरेंस रोवर की सफल लैंडिंग कराई थी। चीन यदि ग्रह के सतह पर सफलता पूर्वक रोवर को उतारने में कामयाब रहता है तो वह यह सफलता हासिल करने वाला अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा देश होगा।
गौरतलब है कि लैंडर और रोवर का कुल वजन 2866 पाउंड है। ये दोनों साथ में ही ऑर्बिटर से उतरेंगे। चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के लूनर एक्सप्लोरेशन एंड स्पेस प्रोग्राम सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर लियू तोंगजी के अनुसार लैंड होने से पहले आखिरी सात मिनट में दोनों अंतरिक्षयानों की गति 12,427 मील (20 हजार किलोमीटर) से कम होकर 0 पर आएगी। इस रोवर में छह उपकरण लगाए गए हैं, जो मंगल ग्रह से जरूरी जानकारी जुटाएंगे।