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अमेरिका के ताजा हालात से बेहद खुश है चीन, लंबे समय तक घरेलू झगड़ों में ही फंसे रहेंगे 'अंकल सैम'

Sat, 09 Jan 2021 05:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग

सार

चीन के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि काफी समय तक बाइडन अपने घरेलू झगड़ों में ही फंसे रहेंगे। चीन के प्रभाव को रोकने के लिए कारगर रणनीति बनाने का वक्त निकट भविष्य में उनके पास नहीं होगा...
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डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग
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विस्तार
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अमेरिका में हुई ताजा घटनाओं को चीन अपने फायदे में देख रहा है। ये कयास काफी समय से लगाए जा रहे हैं कि निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन का चीन के प्रति क्या रुख होगा। अब चीन के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि काफी समय तक बाइडन अपने घरेलू झगड़ों में ही फंसे रहेंगे। चीन के प्रभाव को रोकने के लिए कारगर रणनीति बनाने का वक्त निकट भविष्य में उनके पास नहीं होगा।

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चीनी मीडिया ने छह जनवरी को वाशिंगटन में कैपिटल हिल पर डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों के हमले को खूब महत्व दिया है। चीनी मीडिया ने इस घटना को इस बात का संकेत माना है कि अमेरिकी समाज बिखर रहा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार पीपुल्स डेली के अंतरराष्ट्रीय संस्करण के सोशल मीडिया अकाउंट शियाकदाओ पर अमेरिका की घटनाओं को खूब प्रचारित किया गया। इस सोशल मीडिया अकाउंट से बातचीत में बीजिंग की रेनमिन यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग में प्रोफेसर दिआओ दामिंग ने कहा- कैपिटल हिल पर हुए दंगे बताते हैं कि अमेरिकी समाज बंटा हुआ है। वह ऐसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का शिकार है, जिसका कोई अंत नहीं है। नए अमेरिकी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होगी कि वह बिखरते अमेरिका को संभालने के लिए क्या करे।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को प्रमाणित करने के लिए छह जनवरी को हुई अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की बैठक के दौरान ट्रंप समर्थकों ने वहां धावा बोल दिया था, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। उसके बाद अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने की चर्चा फिर से तेज हो गई है। इस बीच चीन में बाइडन प्रशासन के दौरान अपनाई जाने वाली चीन नीति पर चर्चा जारी है।
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शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में अमेरिकी मामलों के विशेषज्ञ शेन दिंगली ने कहा है कि अगर बाइडन ट्रंप के दौर में अपनाई गई अमेरिका फर्स्ट नीति से हटते हैं और भूमंडलीकरण समर्थक नीति अपनाते हैं, तो उससे चीन को फायदा होगा। लेकिन इससे अमेरिका के अंदर उलटी और तीखी प्रतिक्रिया हो सकती है। शेन ने कहा- “हमने कैपिटल हिल पर जो होते देखा, वह केवल ट्रंप की विरासत की झलक नहीं देता। यह दरअसल अमेरिका में मौजूद सिर्फ एक तरह के ध्रुवीकरण का संकेत है। अमेरिका आज नस्लवाद, गरीब और कई दूसरे मसलों पर बंटा हुआ है।” शेन ने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी को भूमंडलीकरण समर्थक माना जाता है। संभावना है कि बाइडन प्रशासन का रुख ट्रंप के दौर से अलग होगा।

शेन ने कहा कि भूमंडलीकरण से चीन को फायदा हुआ है और आगे भी होगा। लेकिन उन्होंने कहा कि चीन के विपरीत अब अमेरिका के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों में लगा सके। उन्होंने कहा- “अमेरिका में कोरोना वायरस और अर्थव्यवस्था की हालत पर गौर कीजिए। क्या (इनसे निपटने की कोशिशों के बाद) उसके पास इतने संसाधन बचेंगे कि वह बहुपक्षीय धरातल पर लगा सके?”

फुदान यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर फॉरेन पॉलिसी के निदेशक रेन शियाओ ने कहा है कि अमेरिका में दिखे सामाजिक विभाजन से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन का आत्मविश्वास और बढ़ेगा। अमेरिकी राजनीति में अभी सबसे अहम मुद्दा ध्रुवीकरण है। इसका असर लंबे समय तक जारी रहेगा। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद जो बाइडन को घरेलू मामलों में काफी ताकत लगानी होगी।

छह जनवरी की घटना के पहले भी चीनी विशेषज्ञों की राय थी कि बाइडन की नीति घरेलू सामाजिक विभाजनों से प्रभावित होगी। चीन की स्टेट काउंसिल (मंत्रिमंडल) के सलाहकार शि यिनहोंग ने कुछ रोज पहले कहा था कि जो बाइडन को शासन करते समय ट्रंप के समर्थन आधार पर खास ध्यान देना होगा। लेकिन उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया था कि चीन के खिलाफ प्रतिबंध के लिए पारित हुए बिलों को दोनों पार्टियों का समर्थन था। इसलिए उनसे बाइडन पीछे हटेंगे, इसकी संभावना नहीं है।

हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज में अमेरिकी मामलों के विशेषज्ञ लिउ वेइदोंग की भी राय है कि अमेरिका के सामाजिक विभाजनों से चीन को कोई खास फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका को समर्थन कई दूसरे पहलुओं के कारण भी मिला है। तानाशाही के खिलाफ उसके रुख, दूसरे देशों को मदद, और अतीत में अंतरराष्ट्रीय संगठनों को उससे मिली मदद के कारण उसका सॉफ्ट पॉवर बना था। ट्रंप के कार्यकाल में भी यह सम्मान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसलिए बाइडन चाहें, तो जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कर सकते हैं। लिउ ने कहा कि दुनिया भर के देश बाइडन के नेतृत्व वाले अमेरिका और चीन के बीच तुलना करने में कुछ समय लगाएंगे। तब जाकर वे इस बारे में किसी नतीजे पर पहुंचेंगे कि इन दोनों देशों में कौन ऐसा है, जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं।

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