अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से चीन अमेरिका और बाकी अन्य मुक्त देशों के लिए अब तक का सबसे बड़ा खतरा है। रेटक्लिफ का यह बयान गुरुवार को ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन पर पेइचिंग के खिलाफ कड़ा रुख बनाने रखने के लिहाज से चीन विरोधी बयान दे रहे हैं।
रैटक्लिफ ने समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित अपने एक आलेख में लिखा कि खुफिया जानकारी साफ है। बीजिंग, अमेरिका और बाकी दुनिया पर आर्थिक, सैन्य और तकनीकी रूप से हावी होने का इरादा रखता है।
उन्होंने कहा, ''चीन की कई प्रमुख सार्वजनिक पहलें और प्रमुख कंपनियां चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियों के लिए आवरण की एक परत पेश करती हैं। मैं आर्थिक जासूसी के इस दृष्टिकोण को ‘चुराना, उसकी नकल करना और उसके बदले दूसरा पेश करना‘ कहता हूं।''
रैटक्लिफ ने दावा किया कि चीन अमेरिकी कंपनियों की बौद्धिक संपदा को लूटता है, प्रौद्योगिकी की प्रतिकृति तैयार करता है और फिर वैश्विक बाजार में अमेरिकी कंपनियों की जगह ले लेता है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारी चीन विरोधी बातें कई महीनों से कर रहे हैं और खास करके राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के लिए भी चीन को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि बाइडन चीन के मामले में नरमी बरत सकते हैं। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बाइडन इस बात से सहमत हैं कि चीन अंतरराष्ट्रीय कारोबार नियमों का पालन नहीं कर रहा है।
चीन ने इस खबर को खारिज किया
उधर बीजिंग में, विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस आलेख को खारिज कर दिया और कहा कि यह चीन की छवि और चीन-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचाने की उम्मीद में गलत सूचना, राजनीतिक विषाणु और झूठ फैलाने के लिए एक और कदम है।