प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग
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चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत में शांति व्यवस्था भंग करने के मकसद से चीन अब आतंकवादियों की मदद लेने से भी गुरेज नहीं कर रहा है। स्थानीय लाइसास न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन म्यांमार के आतंकी संगठनों को पैसे और आत्याधुनिक हथियार देकर नायपिताव आतंकी समूह अराकान सेना को मदद कर रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशिया की जानकारी रखने वाले एक सैन्य सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है कि चीन अराकान सेना के खर्चे का लगभग 95 फीसदी तक दे रहा है। उन्होंने बताया कि अराकान सेना के पास लगभग 50 एमएएनपीएडीएस (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं। एक जानकारी के मुताबिक, चीन की रणनीति अपने प्रभाव को बढ़ाने की है।
अराकान सेना को समर्थन की रणनीति चीन को पश्चिमी म्यांमार यानी भारत-म्यांमार सीमा की ओर सक्षम बना सकती है। सुबीर भौमिक के एक लेख के अनुसार, चीन से हाल ही में हथियारों की डिलीवरी में 500 असॉल्ट राइफल, 30 यूनिवर्सल मशीन गन, 70,000 गोला-बारूद सौंपे, जो समुद्र के रास्ते पहुंचाए गए। फरवरी के तीसरे सप्ताह में म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय जंक्शन से ज्यादा दूर मोनाखली समुद्र तट पर हथियारों को उतार दिया गया था।
म्यांमार को भारत का नया शत्रु बनाने की कोशिश
एक ऑस्ट्रेलियाई विद्वान ने कहा है कि चीन दक्षिण एशिया में एक बहुआयामी खेल खेल रहा है। चीन भारत को कमजोर करना चाहता है। भारत-पाक के संबंध अच्छे नहीं हैं और म्यांमार को वह भारत का नया शत्रु बनाना चाहता है। एक भारतीय सूत्र के अनुसार, चीन नहीं चाहता है कि म्यांमार में भारतीय प्रभाव बढ़े। वह एकाधिकार चाहता है। म्यांमार में भारत के खिलाफ अराकान सेना का चीन समर्थन काफी प्रभावी रहा है।
भारतीयों व म्यांमार सांसद का अपहरण कर चुकी है अराकान सेना
जून 2017 में भारत के सी एंड सी कंस्ट्रक्शन को 22 करोड़ डॉलर के सड़क निर्माण का ठेका मिला था। म्यांमार सरकार ने जनवरी 2018 तक मंजूरी में देरी कर दी। एक बार जब निर्माण कार्य चल रहा था, तो अराकन सेना ने भारतीय नागरिकों, अग्निशमकों समेत चालक दल और म्यांमार के संसद सदस्य का अपहरण कर लिया।