बार्नेट के अनुसारए ‘ग्यालाफुग’ पर दावा जताकर चीन भूटान सरकार पर क्षेत्र को उसके हवाले करने का दबाव बना रहा है। इसका मकसद भारत से जारी संघर्ष में सैन्य लाभ हासिल करना है। यानी चीन को असल में यह इलाका चाहिए नहीं, लेकिन सिर्फ भारत पर दबाव बनाने के लिए वह इसपर कब्जा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ग्यालाफुग’ में निर्माण चीन और भूटान के बीच हुई स्थापना संधि का सीधा उल्लंघन है। बीजिंग भूटान के कई अन्य सीमाई इलाकों में भी सैन्य दखल बढ़ा रहा है, जिसका हिमालयी देश ने कड़ा विरोध किया है।
वर्ष 2017 में भी भूटान के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में चीन ने एक क्रॉस रोड बनाने की कोशिश की थी। यह जगह भारतीय सीमा से सटी हुई है, जिसकी वजह से डोकलाम में 73 दिनों तक सैकड़ों भारतीय और चीनी सैनिकों का आमना-सामना भी हुआ था। फिर बाद में चीन को यह जगह छोड़नी पड़ी थी।